- उत्तरकाशी की सरतमा देवी को यूएनडीपी ने महिला जल चैंपियन चुना
- चाल-खालों को बनाकर जल स्त्रोतों को कर रही पुनर्जीवित
देहरादून। पहाड़ी की नारी का पहाड़ सा अडिग हौंसला। जी हां हम यहां बात कर रहे हैं। उत्तरकाशी जिला पटारा गांव की सरतमा देवी की। सरमता वो वो जीवट महिला है, जिसने प्राकृतिक जल स्त्रोतों को रिजार्च करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज उसी का प्रतिफल है सरतमा देवी को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यूएनडीपी की ओर से महिला जल चैंपियन चुना गया है। बकौल सरतमा देवी गांव में कुछ साल पहले तक पुराने पारंपरिक जल स्त्रोत सूखे चुके थे। हमने जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने की ठानी। जगह छोटे तालाब बनवाए, ताकि पारंपरिक जल स्त्रोत रिचार्ज हो सकें। पालतू पशुओं और जंगली जानवरों की प्यास बुझाई जा सके। आज इस महिला को हम सरतमा देवी के नाम से जानते हैं। सरतमा देवी देशभर की उन 41 महिलाओं में शामिल हैं, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया। ये सम्मान पाने वाली वो उत्तराखंड की अकेली महिला हैं। सरतमा देवी हिम पटारा ग्राम संगठन की अध्यक्ष हैं। उनके संगठन को प्रतिष्ठित पर्यावरणीय संस्था अर्थ डे नेटवर्क ने स्टार वूमेंस ऑर्गनाइजेशन का दर्जा दिया है। हिम पटारा ग्राम संगठन के जरिए सरतमा देवी चाल-खाल की मुहिम को आगे बढ़ा रही हैं। तीन साल पहले रिलायंस फाउंडेशन से प्रेरित होकर उन्होंने गांव में जल संरक्षण की दिशा में काम शुरू किया था। इस दौरान चाल-खालों की सफाई के साथ नए चालों का निर्माण किया गया। पिछले साल अक्टूबर में हिम पटारा ग्राम संगठन के काम की सराहना करते हुए प्रतिष्ठित अर्थ डे नेटवर्क ने संगठन को स्टार वूमेंस ऑर्गेनाइजेशन का दर्जा दिया था। बीते शनिवार को स्टाकहोम अंतरराष्ट्रीय जल संस्थान, जल संसाधन मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के तत्वावधान में हुए ऑनलाइन कार्यक्रम में देश की 41 महिलाओं को महिला जल चैंपियन के खिताब से नवाजा गया। जिनमें उत्तराखंड की सरतमा देवी भी शामिल हैं।
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