पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले में, जहाँ सस्ता और निशुल्क राशन कई परिवारों के लिए जीवन रेखा है, वहीं उसी योजना ने लोगों को गहरे संकट में डाल दिया। पाभैं, डुंगरा और धारी की सस्ता गल्ला दुकानों में जब उपभोक्ता राशन लेने पहुँचे, तो उन्हें अनाज नहीं बल्कि सड़ा हुआ चावल मिला। दुकानों में रखी बोरियों से सफेद कीड़े बाहर निकल रहे थे। फर्श और दीवारों पर रेंगते कीड़े देख लोग ठिठक गए। बोरियां खोली गईं तो सामने आया कि 40 क्विंटल से अधिक चावल पूरी तरह सड़ चुका है, काला पड़ गया है और बदबू मार रहा है, किसी ने भी यह राशन घर ले जाना स्वीकार नहीं किया। लोग खाली हाथ लौट गए।
यह राशन बीते दिनों खाद्यान्न गोदाम से भेजा गया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि यह चावल गोदाम में कब से सड़ रहा था, और बिना किसी जांच के उपभोक्ताओं तक कैसे पहुँचा। जिन परिवारों के लिए यह राशन जरूरी था, वही आज सबसे ज्यादा असहाय नजर आए। स्थानीय लोगों का गुस्सा साफ है। उनका कहना है कि सरकार और पूर्ति विभाग सस्ता राशन नहीं, बीमारी बाँट रहे हैं। सीमांत क्षेत्र में पहले ही स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं, ऐसे में सड़ा हुआ अनाज लोगों की जान पर बन सकता है।
मामला सामने आने के बाद जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार ने जांच और कार्रवाई की बात कही है। वहीं सस्ता गल्ला विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष मनोज पांडे ने भी इसे पूर्ति विभाग की गंभीर लापरवाही बताया है और कहा है कि इसकी वजह से विक्रेताओं पर बेवजह सवाल उठ रहे हैं। यह केवल खराब अनाज की आपूर्ति का मामला नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जो कागजों में गरीब का पेट भरती है, लेकिन जमीनी हकीकत में उसके हिस्से का अनाज सड़ने देती है।
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