देहरादून। प्रदेश में अब पहचान छिपा कर विवाह करना गैर कानूनी होगा। ऐसा करने पर विवाह निरस्त किया जा सकेगा। साथ ही पहचान छिपाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जाएगी। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संशोधित अध्यादेश में यह व्यवस्था की गई है। अब विवाह, लिव इन में बल, दबाव, धोखाधड़ी या विधि विरुद्ध काम करने वालों को कठोर दंड मिलेगा।
सरकार के समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 को राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह बदलाव प्रदेशभर में लागू हो गए हैं। इससे पूर्व अगस्त में विधानसभा से पास हुए संशोधन विधेयक को कुछ त्रुटियों के कारण लोकभवन ने लौटा दिया था।
समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल की ओर से जारी कर दिया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। अब आगामी विधानसभा में सरकार इसका विधेयक लाएगी, जो पास होने के बाद यह सदा के लिए यूसीसी कानून का हिस्सा बन जाएगा। आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता 2023 को लागू किया गया है।
यूसीसी की धारा 12 के तहत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। सब रजिस्ट्रार की ओर से निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई न किए जाने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक एवं पंजीयक जनरल को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है। सब रजिस्ट्रार पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार प्रदान किया गया है। दंड की वसूली भूराजस्व की भांति करने का प्रावधान जोड़ा गया है।
नए बदलावों के तहत विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह एवं लिवइन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव इन संबंध की समाप्ति पर रजिस्ट्रार की ओर से समाप्ति प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान किया गया है। अनुसूची-2 में विधवा शब्द के स्थान पर जीवनसाथी शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव इन संबंध एवं उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान कर दी गई है।
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