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अब जाएं तो कहां जाएं, अफगान छात्रों की मुसीबत

भारत के विवि में पढ़ रहे छात्र मुसीबत में

  • डिग्रियां हो चुकी हैं पूरी, नहीं जाने चाहते हैं अपने देश
  • पासपोर्ट व वीजा की वैधता समाप्त होने पर दिक्कत
  • छात्रों ने भारत सरकार ने से लगाई गुहार
  • उत्तराखंड के जीबी पंत विवि में 4 अफगान छात्रों की फेलोशिप हो चुकी है पूरी

नई दिल्ली-ऊधमसिंहनर। भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। कई छात्रों का कोर्स पूरा हो गया है। अपने देश जाने के लिए उनका बकायदा बीजा भी बन गया है। लेकिन उन्हें तलिबानियों का खौफ सता रहा है। अफगान के रखवाले राष्ट्रपति गनी ही वहां से देश होकर भाग चुके हैं। जेएनयू के छात्रों ने विवि प्रशासन और भारत सरकार से अफगानिस्तान के हालात देखते हुए मदद की गुहार लगाई है। उत्तराखंड के गोविंद वल्लभ पंत कृषि विवि पंतनगर में फेलोशिप पर पढ़ रहे छात्र अब अपने देश वापस नहीं लौटना चाहते हैं। इनकी डिग्रियां पूरी हो चुकी हैं।
जीबी पंत विवि में फेलोशिप पर चार अफगानी छात्र मुस्तफ सुल्तानी एमएसएसी, हजरत शाह अजीजी एमएसएसी, हासिमी पीएचडी, अब्दुल वहाब एमएससी, कर रहे हैं। अब्दुल सेमेस्टर छुट्टी के दौरान अफगानिस्तान चले गए थे। अन्य तीनों छात्रा भी वतन वापसी तैयारी कर रहे थे। तीन माह से उनकी अपने परिजनों से बात नहीं हुई। पासपोर्ट और वीजा की अवधि भी समाप्त होने को है। ऐसे में उनके सामने बड़ी मुसीबत है।

क्या है विदेश छात्रों के लिए नियम

डिग्री पूरी होने के बाद वीजा वैधता समाप्त होने पर उन्हें एंबेसी में समय रहते ऑलाइन आवेदन करना पड़ता है, जबकि पासपोर्ट की वैधता समाप्त होने पर दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में आवेदन करना होता है। वैधता बढ़ाने की संस्तुति काबुल या दुबई से संभव है, जिसमें एक से दो माह का समय लग जाता है। इन आवेदनों के साथ विवि बोनासफाइड सर्टिफिकेट भी लगाना पड़ता है। छात्रों ने बताया कि हमारे पासपोर्ट और वीजा के साथ बैंक अकाउंट और सिमकार्ड भी संबद्ध हैं। पासपोर्ट व वीजा की वैधता समाप्त होते ही हमारे अकाउंट और सिम भी फ्रीज हो जाएंगे। इसके साथ ही हम भारत के किसी भी होटल, रेस्टोरेंट और रेलवे की सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे।

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