नई दिल्ली। नए संसद भवन में पहले दिन की कार्यवाही में महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल की पुरजोर वकालत की। पीएम मोदी के भाषण के बाद लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लोकसभा में पेश किया।
बिल पेश करते हुए उन्होंने कहा कि इस बिल को दोनों सदनों से पारित किए जाने के बाद लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 181 हो जाएगी। लोकसभा में फिलहाल 82 महिला सांसद हैं। बता दें कि निचले सदन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो जाएगी।
संसद में महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद उत्तर प्रदेश में महिलाओं को इसका बड़ा लाभ मिलेगा। बिल पास होने पर प्रदेश में लोकसभा की 26 सीटें और विधानसभा में 132 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। बता दें कि बीते दिन संसद के विशेष सत्र के बीच कैबिनेट की अहम बैठक हुई। इस बैठक में महिला आरक्षण बिल को मंजूरी मिल गई है। अब महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा।
मालूम हो कि यूपी विधानसभा में 403 सदस्य हैं जिनमें से अभी महज केवल 48 महिलाएं हैं। प्रदेश में केवल 12 फीसदी ही उनकी भागीदारी है। वहीं, विधान परिषद में उनकी भागीदारी मात्र 6 फीसदी है। इसके साथ-साथ ही लोकसभा सीटों की बात करें तो यूपी में कुल 80 सीटें हैं, जिसमें 11 सांसद ही महिलाएं हैं. यानी, उत्तर प्रदेश में केवल 14% महिला प्रतिनिधित्व है।
महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी (एक तिहाई सीटें) आरक्षित करने का प्रस्ताव है। लोकसभा में अभी महिला सांसदों की संख्या 15 फीसदी से कम है, जबकि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है।
बता दें कि इस बिल को लेकर लोकसभा में विपक्षी नेता और कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल अभी भी अस्तित्व में हैं। इसे राजीव गांधी, नरसिम्हाराव और मनमोहन सिंह की सरकार में भी पेश किया गया था। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिल अब अस्तित्व में नहीं है। नेता प्रतिपक्ष के बयान को रिकार्ड से हटाया जाए। नेता प्रतिपक्ष के इस बयान पर लोकसभा में जमकर हंगामा मचा। बयान पर हंगामा मच गया है। उनके भाषण पर एनडीए सांसदों ने आपत्ति जताई है।
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