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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: जंतर-मंतर की ओर मार्च में उतरे कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। इस बार वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण भी बड़ी संख्या में वकीलों और समर्थकों के साथ जंतर-मंतर की ओर मार्च करते नजर आए। प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में वकील और छात्र संगठन

मार्च में वकीलों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और कई युवा व सिविल सोसाइटी समूहों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग में फैसले एकतरफा तरीके से लिए जा रहे हैं। इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि CEC इस्तीफा दें, SIR के तहत हुए बदलावों की समीक्षा हो और चुनाव आयोग के कामकाज में सुधार किया जाए। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस ने लगाई धारा 163, कई लोग हिरासत में

दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर रखी है, जिसके तहत बिना अनुमति भीड़ जुटाने, जुलूस निकालने और धरना देने पर रोक है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।

रिपोर्टों के मुताबिक शनिवार दोपहर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया, जिनमें प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव भी शामिल बताए गए। इससे पहले शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन FIR दर्ज की हैं।

शुक्रवार से जारी है विरोध

यह विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर को शुरू हुआ था, जब दिल्ली के साथ मुंबई समेत कई शहरों में CEC के खिलाफ कार्यक्रम हुए। दिल्ली में अनुमति न मिलने के बावजूद लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे। योगेंद्र यादव ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही।

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आगे क्या

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध और तेज किया जाएगा। वहीं, नई दिल्ली जिले में धारा 163 के तहत लगी पाबंदियां फिलहाल लागू हैं। अब नजर इस पर है कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और हिरासत में लिए गए लोगों को कब तक छोड़ा जाता है।

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