जंतर मंतर प्रदर्शन: दूसरे दिन भी टकराव, नेहा बोरा और योगेंद्र यादव समेत 150 से ज्यादा हिरासत में
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर प्रदर्शन शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। निषेधाज्ञा के बावजूद जुटे प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच कई जगह टकराव की स्थिति बनी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने करीब 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव भी शामिल हैं।
जंतर मंतर प्रदर्शन: कौन-कौन हिरासत में
नेहा बोरा की अपील पर छात्र और युवा कार्यकर्ता शनिवार को फिर जंतर-मंतर की ओर बढ़े। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को मौके से ही बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को भी हिरासत में लिया गया, जबकि राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी मार्च में शामिल हुए।
हिरासत के बाद जारी एक वीडियो संदेश में नेहा बोरा ने कहा कि हिरासत से प्रदर्शनकारी डरने वाले नहीं हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी रहेगी।
धारा 163 लागू, तीन FIR दर्ज
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है, जिसके तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के एक जगह जुटने, जुलूस और नारेबाजी पर रोक है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना) के तहत संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में तीन FIR दर्ज की हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें अभी किसी व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है।
सुरक्षा के लिहाज से इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवाएं बाधित रहीं और कई मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही रोकी गई।
क्या है विवाद
प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को भी जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी और सौरभ भारद्वाज शामिल थे।
यह भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: जंतर-मंतर की ओर मार्च में उतरे कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण
आगे क्या
आयोजकों ने चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो 10 अक्टूबर को बड़े स्तर पर लोगों को जुटाया जाएगा। वहीं पुलिस का कहना है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे पर सियासी तापमान और बढ़ने के आसार हैं।
