केरल काले झंडे विवाद: मंत्री रोजी एम जॉन के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन
चेंगन्नूर (केरल): केरल काले झंडे की राजनीति अब राज्य के मंत्रियों तक पहुंच गई है। सामने आए एक वीडियो में भाजपा कार्यकर्ता चेंगन्नूर में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन को काले झंडे दिखाते नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है।
अंगमाली से कांग्रेस विधायक रोजी एम जॉन राज्य की नई यूडीएफ सरकार में उच्च शिक्षा विभाग संभाल रहे हैं। इस ताजा घटना पर पुलिस कार्रवाई या किसी हिरासत की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कैसे शुरू हुआ केरल काले झंडे का सिलसिला
विवाद की शुरुआत 26 सितंबर को हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोल्लम दौरे के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने काले झंडे लहराए। भाजपा ने इसे सुरक्षा में गंभीर चूक बताया।
इसके जवाब में भाजपा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 27 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर प्रियंका गांधी वाड्रा, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और राज्य के एक अन्य मंत्री को काले झंडे दिखाए गए। 28 सितंबर को कोल्लम और कन्नूर में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के काफिले के रास्ते में भी ऐसा ही विरोध हुआ, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई।
दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस का आरोप है कि तिरुवनंतपुरम जिले में उसके दफ्तरों पर हमले हुए और स्थानीय नेताओं को धमकाया गया। दूसरी ओर भाजपा का आरोप है कि उसके एक जिला अध्यक्ष पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि मंत्रियों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि अमित शाह के काफिले वाली घटना में ऐसा नहीं हुआ। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा है कि हमलावर चाहे किसी भी दल के हों, उन पर सख्त कार्रवाई होगी और पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
राज्य की राजनीति पर असर
2026 के विधानसभा चुनाव के बाद केरल में सत्ता बदली है और अब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार है। ऐसे में भाजपा विपक्ष के तौर पर सड़क पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने में जुटी है, जबकि कांग्रेस इसे कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश बता रही है। जानकारों का मानना है कि काले झंडे दिखाना लोकतांत्रिक विरोध का पुराना तरीका है, लेकिन इसके बहाने हिंसा की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं।
आगे क्या
भाजपा ने संकेत दिए हैं कि कांग्रेस नेताओं के खिलाफ विरोध जारी रहेगा, वहीं राज्य सरकार ने मंत्रियों के कार्यक्रमों में सुरक्षा कड़ी करने की बात कही है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और दोनों दलों का रुख तय करेगा कि यह टकराव थमता है या और तेज होता है।
