- लोकसभा में अमित शाह ने भारतीय संहिता सुरक्षा विधेयक 2023 पेश किया
- 3 कानून बदल जाएंगे और देश में आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव होगा
- अंग्रेजों के जमाने के कानून अब नहीं चलेंगे
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन आज शुक्रवार (11 अगस्त) को लाेकसभा में अंग्रेजों शासन के कानून बदलने के लिए अहम बिल संसद में पेश हुआ। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय संहिता सुरक्षा विधेयक 2023 पेश किया है, जो सदियों पुराने औपनिवेशिक आईपीसी, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में संशोधन करेगा।
लोकसभा में बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा कि ‘इन तीनों कानूनों को रिप्लेस कर के इनकी जगह तीन नए कानून जो बनेंगे, उनकी भावना भारतीयों को अधिकार देने की होगी। इन कानूनों का उद्देश्य किसी को दंड देना नहीं होगा। इसका उद्देश्य होगा लोगों को न्याय देना।’ अमित शाह ने कहा कि ’18 राज्यों, छह केंद्र शासित प्रदेशों, भारत की सुप्रीम कोर्ट, 22 हाईकोर्ट, न्यायिक संस्थाओं, 142 सासंद और 270 विधायकों के अलावा जनता ने भी इन विधेयकों को लेकर सुझाव दिए हैं। चार साल तक इस पर काफी चर्चा हुई है। हमने इस पर 158 बैठकें की हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘1860 से 2023 तक देश की आपराधिक न्याय प्रणाली अंग्रेजों के बनाए कानूनों के मुताबिक चलती थी। तीन कानूनों को बदल दिया जाएगा और देश में आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। आईपीसी को अब भारतीय न्याय संहिता कहा जाएगा। राजद्रोह को खत्म करने का प्रस्ताव।
इसके तहत अंग्रेजों के बनाए गए तीन कानून बदले जाएंगे। पुराने कानून नहीं चलेंगे. गुलामियों की निशानियों को मिटाया जाएगा। अमित शाह ने कहा, ‘इस विधेयक के तहत हमने लक्ष्य रखा है कि सजा का अनुपात 90 प्रतिशत से ऊपर ले जाना है। इसीलिए हम एक महत्वपूर्ण प्रावधान लाए हैं कि जो धाराएं 7 साल का प्रावधान करती हैं या अधिक जेल की सजा, उन सभी मामलों के तहत फोरेंसिक टीम का अपराध स्थल पर जाना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
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