समाजवादी पार्टी में बाप बेटे के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। ख़बरों के अनुसार अखिलेश और मुलायम के बीच चल रही वार्ता विफल हो गई है। अब इस लड़ाई में अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है।

समाजवादी पार्टी में दंगल के बाद अब सुलह के आसार नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग में अपना पक्ष रखने के बाद मुलायम सिंह लखनऊ लौट चुके हैं। खबर हैं कि अखिलेश और मुलायम के बीच एक बार फिर सुलह हो सकती है। अखिलेश का मुलायम से मिलने के लिए मंगलवार को उनके आवास पर पहुंचना इस खबर की पुष्टि करता है। माना जा रहा है कि बाप-बेटे की यह मुलाक़ात काफी अहम है। यह समाजवादी पार्टी का भविष्य तय करेगी।

 

वहीं शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि मुझे बैठक के बारे में नहीं पता, अगर नेताजी बुलाते हैं तो जरूर जाऊंगा। शिवपाल के बयान आने के कुछ देर बाद ही खुद शिवपाल अपने बेटे आदित्य के साथ मुलायम आवास पहुंच गए।

ख़बरों के मुताबिक़ अभी भी मुलायम और अखिलेश में सुलह की गुंजाइश बनी हुई है। टिकटों के बंटवारे के अधिकार से लेकर संगठन में बदलाव और कुछ प्रमुख लोगों की पार्टी से रुखसती के अधिकार मिलने पर अखिलेश पिता मुलायम के समक्ष सरेंडर कर सकते हैं। यह भी चर्चा है कि पिता-पुत्र में सहमति बनी है कि अखिलेश यादव सपा का अध्यक्ष पद छोड़ देंगे।

अखिलेश की एक शर्त ये भी है कि शिवपाल यादव को राष्ट्रीय राजनीति में भेज दिया जाए, क्योंकि प्रदेश में रहकर दोनों साथ काम नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि अखिलेश अमर सिंह के साथ ही शिवपाल के ऊपर भी पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप सार्वजनिक तौर पर लगा चुके हैं।

वहीं मंगलवार को अखिलेश खेमे की तरफ से प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग में दावा पेश कर दिया है। उनका कहना है कि चुनाव निशान साइकिल उनका है। इसलिए पार्टी पर भी उन्हीं का हक है।

इससे पहले सोमवार को ही मुलायम सिंह कह चुके हैं कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उनके बिना अनुमति के अधिवेशन नहीं बुलाया जा सकता। लिहाजा पार्टी के सिंबल पर उन्हीं का अधिकार है।

अब यह मुलाक़ात क्या रंग लाती है? समाजवादी परिवार में आई दरार ख़त्म होगी कि नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा।