मोदी ट्रंप फोन कॉल: व्यापार-रक्षा पर चर्चा, रूसी तेल टैरिफ कानून के बीच बात
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को फोन पर बातचीत हुई। यह मोदी ट्रंप फोन कॉल ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का रास्ता खोलने वाला नया कानून पारित किया है। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग की समीक्षा की।
मोदी ट्रंप फोन कॉल में किन मुद्दों पर बात
बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी बातचीत सार्थक रही। उनके मुताबिक दोनों पक्षों ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम एशिया और यूक्रेन की स्थिति समेत क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय शांति से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए गए।
नया अमेरिकी कानून क्यों अहम
राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक कानून (SRIA) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। कानून के प्रावधान हस्ताक्षर के 30 दिन के भीतर प्रभावी होने हैं। भारत रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में है, इसलिए इस कानून का असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है। इस कानून के बाद दोनों नेताओं की यह पहली बातचीत बताई जा रही है।
भारत का रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्रोतों से और बाजार की स्थितियों के आधार पर खरीद जारी रखेगा। मंत्रालय के अनुसार संभावित टैरिफ को लेकर भारत अपनी चिंताएं पहले ही अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचा चुका है। सरकारी सूत्रों ने इस बातचीत को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के व्यापक स्वरूप का संकेत बताया।
ट्रेड डील पर भी नजर
रिपोर्टों के मुताबिक वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस समय अमेरिका में हैं और द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर पर हुई यह बातचीत वार्ताकारों के लिए अहम मानी जा रही है।
आगे क्या
अब नजर इस पर रहेगी कि अमेरिका नए कानून के तहत भारत पर कोई टैरिफ लगाता है या बातचीत से रास्ता निकलता है। आने वाले हफ्तों में व्यापार वार्ता की प्रगति और टैरिफ पर अमेरिकी प्रशासन का फैसला दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेंगे।
