Sunday , September 13 2026
Breaking News
Home / उत्तराखण्ड / 38 साल बाद बर्फ में सुरक्षित मिला उत्तराखंड के शहीद का पार्थिव शरीर

38 साल बाद बर्फ में सुरक्षित मिला उत्तराखंड के शहीद का पार्थिव शरीर

हल्द्वानी। यहां के निवासी 19 कुमाऊं रेजीमेंट के लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर 38 साल बाद भी सुरक्षित मिला है। परिजनों ने बताया कि सियाचिन में बर्फ में दबे रहने की वजह से शहीद की पार्थिव देह को नुकसान नहीं हुआ है।
शहीद चंद्रशेखर का जब शव मिला तो उनकी पहचान उनके हाथ में बंधे ब्रेसलेट से हुई। इसमें उनका बैच नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज थीं। गौरतलब है कि बैच नंबर से सैनिक के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके बाद उनके परिजनों को सूचना दी गई।
मिली जानकारी के अनुसार भारत-पाकिस्तान की झड़प के दौरान मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के लिए 20 सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई थी। इसमें लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला भी शामिल थे। सभी सैनिक सियाचिन में ग्लेशियर टूटने की वजह से इसकी चपेट में आ गए थे। जिसके बाद किसी भी सैनिक के बचने की उम्मीद नहीं थी। सरकार और सेना की ओर से सैनिकों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसमें 15 सैनिकों के शव मिल गए थे लेकिन पांच सैनिकों का पता नहीं चल सका था।
गौरतलब है कि सियाचिन दुनिया के बेहद दुर्गम सैन्य स्थलों में से एक है। यह बहुत ऊंचाई पर स्थित है, जहां जीवित रहना एक सामान्य मनुष्य के बस की बात नहीं है। भारत के सैनिक आज भी वहां पर अपनी ड्यूटी निभाते हैं। 1984 में देश के सैनिकों ने इस जगह को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लिया था। इस अभियान में कई सैनिकों ने अपनी शहादत दी थी।
सेना से सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के मध्य साल 1972 में हुए शिमला समझौते के बावजूद सियाचिन का मसला नहीं सुलझा था। पाकिस्तान इस क्षेत्र पर कब्जा जमाना चाहता था। इसलिए पाकिस्तान ने अपनी तरफ से पर्वतारोहियों को सियाचिन में चढ़ने की इजाजत दी थी। ताकि भविष्य में भी इस मुद्दे पर भारत से विवाद हो तो वह इस पर अपना दावा कर सके। पाकिस्तान इस क्षेत्र को सैन्य कार्रवाई के तहत हथियाना चाहता था। इसलिए भारत ने 13 अप्रैल 1984 में ऑपरेशन मेघदूत की शुरुआत की थी। भारत को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान 17 अप्रैल को ग्लेशियर पर कब्जा करने की योजना बना रहा है।
इससे पहले ही भारत ने पूरे ग्लेशियर पर कब्जा कर लिया। 1971 की जंग के बाद पाकिस्तान की ये एक और बड़ी हार थी। इस क्षेत्र की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि अगर पाकिस्तान का इस पर कब्जा हो जाता तो उसकी सीमा अक्साइाईचिन से मिल जाती, जो भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित होती। अब शहीद चंद्रशेखर के परिजन उनके पार्थिव शरीर के दर्शनों के इंतजार में हैं।

About team HNI

Check Also

CM धामी ने समस्त जिलाधिकारियों के साथ की वर्चुअल बैठक

सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान में तेजी लाने के निर्देश भू कानून का …

Leave a Reply