देहरादून। अंतर धार्मिक व अंतरजाति में शादी के मामलों में प्रॉपर कानून का पालन किया जा रहा है या नहीं अब पुलिस इसकी जांच करवाएगी। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों के एसएसपी को आदेश जारी किए जाएंगे। प्रदेश में अंतर धार्मिक व अंतरजातीय शादियों के लिए साल 2018 में कानून लाया गया था। जिसके तहत अब प्रदेश में पिछले पांच सालों में हुई अंतर धार्मिक व अंतरजातीय शादियों की दोबारा से जांच होगी।
नए कानून के तहत यदि कोई धर्म परिवर्तन करता है उसके लिए जिलाधिकारी कार्यालय में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। अब सभी जिलों के एसएएसपी व एसपी से जांच कराई जाएगी कि 2018 के बाद जो भी अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह हुए हैं उसमें कानून का पालन किया जा रहा है या नहीं। साल 2022 में इसमें संशोधन किया गया। जिसके बाद जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रवाधान कर दिया गया है।
अंतर धार्मिक मामलों में 2023 में पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष छह महीनों में ही अंतर धार्मिक विवाह के प्रदेश में 46 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर ऐसे हैं, जिसमें मुस्लिम युवक नाम बदलकर पहले युवती को प्रेमजाल में फंसाता है और इसके बाद उससे शादी कर लेता है। शादी करने के बाद उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता है। वर्ष 2022 में इस तरह के 78 मामले सामने आए थे।
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