• सुद्धोवाला जेल की क्षमता 580 की, लेकिन फिलहाल करीब 1100 कैदी हैं बंद

देहरादून। यहां सुद्धोवाला जेल के 26 और कैदियों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। लगातार कैदियों के कोरोना पॉजिटिव आने से जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
जिला जेल में अब रोज ही कैदी पॉजिटिव पाये जा रहे हैं। बीते शुक्रवार को एक कैदी में कोरोना की पुष्टि हुई थी। आसपास रहने वाले अन्य कैदियों की जांच कराई तो शनिवार को सात और कैदियों में कोरोना की पुष्टि हुई। अब स्थिति और विस्फोटक हो गई है। रविवार को 26 कैदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद से जेल प्रशासन के होश उड़े हुए हैं। जेल की क्षमता 580 की है, लेकिन वर्तमान में करीब 1100 कैदी हैं।
लगातार कैदियों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद जेल प्रशासन ने शासन से कहीं और अस्थायी जेल बनाने की मांग की थी। जिसके बाद डीएम के आदेश पर सुद्धोवाला स्थित महिला पॉलिटेक्निक को अस्थायी जेल बना दिया गया है। जेल अधीक्षक महेंद्र सिंह ग्वाल ने बताया कि नए कैदियों को अब यहीं रखा जाएगा। इसके लिए महिला पॉलिटेक्निक में बनाई गई अस्थायी जेल में बंदीरक्षक की नियुक्ति सहित सभी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। यहां नए कैदियों को रखना शुरू कर दिया गया है। जेल में कोरोना पॉजिटिव मामले बढ़ने के बाद बैरकों को नियमित रूप से सैनिटाइज किया जा रहा है। अब जेल प्रशासन ने बंदियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जेल अधीक्षक ने कहा कि हर तरह की सुरक्षा और सावधानियां बरती जा रही हैं। 
जेल में कोरोना पॉजिटिव मामले आने के बाद दून अस्पताल में भर्ती बंदी मौके का फायदा उठाकर भाग न जाएं, इसके लिए पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि अस्पताल के बाहर पीपीई किट पहने पुलिसकर्मियों को 24 घंटे तैनात कर दिया गया है, ताकि कोई भी कैदी अस्पताल से भाग न पाए। सभी पुलिसकर्मियों को कैदियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। 
सुद्धोवाला जेल में इस समय विचाराधीन और सजयाफ्ता करीब 1100 बंदी हैं। ऐसे में सात बंदियों में संक्रमण मिलना चिंताजनक है। यहां पहले ही क्षमता से अधिक कैदी हैं। ऐसे में अब नए बंदियों को अलग अलग रखने की व्यवस्था भी की जा रही है। लॉकडाउन की शुरूआत में प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों को पैरोल पर रिहा करने की बात कही थी। इस योजना के अंतर्गत सुद्धोवाला जेल के लगभग 120 कैदियों का नाम आया था। इनमें से बड़ी संख्या में कैदी पैरोल पर रिहा हो गए थे, मगर कुछ ने घर न जाने की अर्जी लगाई थी।