अखिलेश यादव लैपटॉप योजना की याद: मंच से एजुकेटर का तंज, बोलीं- आज फ्यूचर पर्ची वाला बाबा तय करता है
उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के ‘अखिलेश के साथ’ कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए एजुकेटर नीतू सिंह ने सपा सरकार की अखिलेश यादव लैपटॉप योजना को याद किया और मौजूदा हालात पर तीखा तंज कसा। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे।
मंच से क्या बोलीं नीतू सिंह
वीडियो में नीतू सिंह कहती हैं कि अखिलेश यादव को देखकर उन्हें करीब 2013 का वह दौर याद आ गया, जब उनकी सरकार ने छात्रों को लैपटॉप बांटे थे। इसके बाद उन्होंने 13 साल पहले के विजन की तुलना आज से करते हुए कहा कि आज हमारा फ्यूचर कोई पर्ची वाला बाबा तय करता है।
नीतू सिंह ने अपने भाषण में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। उनके इस बयान को शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर एक राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। इस बयान पर भाजपा या किसी अन्य पक्ष की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
क्या थी अखिलेश यादव लैपटॉप योजना
2012 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के बाद अखिलेश यादव ने 12वीं पास छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देने की योजना शुरू की थी। यह सपा के चुनावी वादों में शामिल थी और लाखों छात्रों को इसके तहत लैपटॉप दिए गए थे। समाजवादी पार्टी आज भी इस योजना को अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती है और चुनावी मंचों से इसका जिक्र करती रहती है।
हालांकि विपक्षी दल इस योजना पर सवाल भी उठाते रहे हैं। बाद में प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी युवाओं के लिए टैबलेट और स्मार्टफोन वितरण की अपनी योजना शुरू की। इस तरह युवाओं को डिजिटल उपकरण देने का मुद्दा यूपी की राजनीति में लगातार बना हुआ है।
2027 चुनाव से पहले सपा की तैयारी
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले समाजवादी पार्टी अलग-अलग कार्यक्रमों और यात्राओं के जरिए युवाओं, शिक्षकों और पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग तक पहुंच बनाने में जुटी है। ‘अखिलेश के साथ’ जैसे कार्यक्रमों में अलग-अलग क्षेत्रों के लोग मंच से अपनी बात रख रहे हैं।
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आगे क्या
सपा के ऐसे कार्यक्रम आने वाले हफ्तों में भी जारी रहने की उम्मीद है। शिक्षा, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दे चुनाव से पहले यूपी की राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे और इन पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
