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ज्ञानेश कुमार आवास मामला: आगरा में 6 कांग्रेस कार्यकर्ता जेल से रिहा, पुलिस से नोकझोंक

आगरा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास पर नारे लिखने के आरोप में जेल भेजे गए छह कांग्रेस कार्यकर्ता रविवार को जमानत पर रिहा हो गए। ज्ञानेश कुमार आवास मामले में रिहाई के बाद कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर नारेबाजी करते हुए जुलूस निकालने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

कोर्ट ने शनिवार को दी थी जमानत

आगरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने शनिवार, 3 अक्टूबर को सभी छह कार्यकर्ताओं की जमानत अर्जी मंजूर की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने हर आरोपी को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद रविवार को सभी जेल से बाहर आए।

रिहा होने वालों में कांग्रेस के प्रदेश संगठन महासचिव अनिल यादव और मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर भी शामिल हैं। बाकी चार कार्यकर्ता भी पार्टी से जुड़े बताए गए हैं।

ज्ञानेश कुमार आवास पर क्या हुआ था

पुलिस के अनुसार 28 सितंबर को दो दर्जन से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ता हरीपर्वत थाना क्षेत्र की विजय नगर कॉलोनी स्थित मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक घर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने वहां नारेबाजी की और गेट व दीवार पर काले रंग से आपत्तिजनक शब्द लिखे। बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी डाला गया। अगले दिन, 29 सितंबर को पुलिस ने छह कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

कांग्रेस का कहना है कि यह प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर पार्टी के देशव्यापी अभियान का हिस्सा था। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव आयोग पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है।

हत्या के प्रयास की धारा पर कोर्ट की टिप्पणी

पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में केस दर्ज किया था, जिनमें हत्या का प्रयास (धारा 109), सरकारी कर्मचारी पर हमला, बलवा और धमकी जैसी धाराएं शामिल थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं पाए। अब मामला सात साल से कम सजा वाली धाराओं में चलेगा।

कांग्रेस नेताओं ने इसे पार्टी की जीत बताया। एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने कहा कि अदालत ने पुलिस की लगाई गंभीर धारा हटा दी है।

रिहाई के बाद जेल के बाहर हंगामा

जेल से बाहर आते ही कार्यकर्ताओं का स्वागत करने के लिए समर्थक पहुंचे थे। कार्यकर्ता नारे लगाते हुए जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बिना अनुमति जुलूस निकालने से रोका। इस पर कुछ देर तक कहासुनी होती रही, जिसके बाद मामला शांत हुआ। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे अपना विरोध आगे भी जारी रखेंगे।

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आगे क्या

मुकदमा अब निचली अदालत में आगे चलेगा और पुलिस को बची हुई धाराओं में आरोपपत्र दाखिल करना है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का विरोध दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में जारी है, ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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