• मुख्यमंत्री ने कहा, इससे कृषि उद्यमियों, कृषि साख समितियों, विपणन सहकारी समितियों, इससे जुड़े स्टार्टअप को कम ब्याज पर ऋण और क्रेडिट गारंटी का मिलेगा लाभ

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई ‘कृषि अवसंरचना निधि के तहत वित्तीय सुविधा’ योजना से कृषि क्षेत्र में बङे सुधार लाने में सहायक होगी। इससे कृषि उद्यमियों, कृषि साख समितियों, विपणन सहकारी समितियों, इससे जुड़े स्टार्टअप को कम ब्याज पर ऋण और क्रेडिट गारंटी लाभ मिलने से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से किसानों को फायदा मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा ‘कृषि अवसंरचना निधि के तहत वित्तीय सुविधा’ नामक केन्द्रीय क्षेत्र की एक नई अखिल भारतीय योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत ब्याज में छूट और वित्तीय सहायता के जरिये, फसलोपरांत प्रबंधन से संबंधित अवसंरचना तथा सामुदायिक कृषि-परिसम्पत्तियों की व्यावहारिक योजनाओं में निवेश के लिए मध्यम और लम्बी अवधि की ऋण-सुविधा के रूप में वित्त-पोषण किया जाएगा।
यह जानकारी केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को प्रेषित पत्र में दी गई है। उन्होंने कहा है कि प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स), विपणन सहकारी समितियों, कृषि उद्यमियों, स्टार्ट-अप और पीपीपी परियोजनाओं इत्यादि को बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा 1 लाख करोड़ रुपये की वित्त पोषण सुविधा प्रदान की जाएगी, इस योजना के तहत वर्तमान वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपये और अगले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 30 हजार करोड़ रूपये के ऋण प्रतिवर्ष वितरित किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इसमें वित्तीयन सुविधा के अंतर्गत 2 करोड़ रूपये तक के सभी ऋणों पर 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज छूट प्रदान की जाएगी और 2 करोड़ रूपये तक के ऋणों के मामले में ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्रेडिट गारण्टी फंड ट्रस्ट’ के तहत पात्र ऋण-ग्रहीताओं के लिए क्रेडिट गारंटी कवरेज भी उपलब्ध होगी। इस कवरेज के लिए शुल्क का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। एफपीओ के मामले में कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की एफपीओ संवर्धन योजना के तहत दी गई सुविधा से क्रेडिट गारंटी लाभ उठाया जा सकता है। इस वित्तपोषण सुविधा के तहत ऋणों की अदायगी के लिए अधिस्थगन अवधि न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 2 वर्ष होगी।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने अवगत कराया है कि कृषि अवसरंचना निधि का प्रबंधन तथा निगरानी ऑनलाइन एमआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। रियल टाइम निगरानी और प्रभावी फीड-बैक सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों की स्थापना की जाएगी। योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2020 से 2029 (10 वर्ष) तक होगी। केन्द्रीय मंत्री ने त्रिवेन्द्र सिंह रावत से योजना के प्रभावी एवं सफल कार्यान्वयन में सहयोग की अपेक्षा करते हुए योजना की प्रगति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के साथ साझा करने की भी अपेक्षा की है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को उत्तराखण्ड के व्यापक हित में बताया है, उन्होंने उत्तराखण्ड में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये।