• शवों के ऊपर भी रख दिया सामान और श्मशान घाट में चल रही है वेटिंग

राजकोट। गुजरात में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा गुरुवार को एक लाख के आंकड़े (100375) को पार कर गया। कोरोना महामारी के खौफ के बीच झकझोर देने वाली खबर राजकोट के सिविल अस्पताल से आ रही है। जहां शव घर में कोरोना मृतकों की लाशों के साथ अमानवीयता की जा रही है। गैलरी में फिलहाल 9 शव रखे हुए हैं, जिनके आसपास कचरे का ढेर है। कुछ शव रात को ही श्मशान भेज दिए गए थे।
अस्पताल में शव इतने हैं कि शव वाहिनी के ड्राइवर और श्मशान में कार्यरत सेवकों के पास खाने और सोने तक का समय नहीं है। श्मशान में अंतिम क्रिया के लिए वेटिंग है। शव वाहन से एक बार में दो-दो बॉडी अंतिम स्थल तक पहुंचाई जा रही हैं। शव घर की एक लॉबी में दीवार किनारे 9 शव रखे हुए थे। शवों के बगल में ही कचरे का ढेर लगा हुआ था। एक शव के ऊपर ही पॉलीथीन और बैग भी रखा हुआ था।

इसी दौरान शव ढोने वाले ड्राइवर से बात की तो उसने बताया कि अभी तक मैं 6 राउंड लगा चुका हूं और शव ज्यादा होने के चलते हर बार दो बॉडी श्मशान तक लेकर जा रहा हूं। हिंदू मृतकों को रामनाथपुरा श्मशान और मुस्लिम मृतकों को पास ही स्थित कब्रिस्तान ले जाया जा रहा है। रामनाथपुर श्मशान में भट्टी को चलाने वाले ने बताया कि भट्टी सुबह से एक बार भी बंद नहीं हुई है। पिछले 15-20 दिनों से हालात इतने खराब हैं कि 24 घंटे शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। भट्टी का तापमान 600 डिग्री सेल्सियस होता है। सामान्य कद वाले शवों की अंतिम क्रिया में 1 से डेढ़ घंटे का समय लगता है। कोरोना मृतकों के मामले में तो ढाई से तीन घंटे का समय लग जाता है।

उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार रात के समय होते हैं। क्योंकि अस्पताल से ज्यादातर शव रात को ही भेजे जाते हैं। रात के 9 बजे से सुबह 7 बजे तक लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।गुजरात में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा गुरुवार को एक लाख के आंकड़े (1,00,375) को पार कर गया। राज्य में कोरोना का पहला मामला 19 मार्च को राजकोट और सूरत में सामने आया था। वहीं 22 मार्च को सूरत में कोरोना से पहली मौत दर्ज की गई थी। इसके बाद से लगातार यह संख्या बढ़ती चली गई।
उधर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मारवाड़ी श्मशानघाट में लाशों के आने का सिलसिला जारी है, जिसकी वजह से यहां जगह की कमी होने लगी है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि पिछले एक हफ्ते में अंतिम संस्कार के लिए पहुंची 10 लाशों को लौटाना पड़ गया।