धामी कैबिनेट के 26 फैसले: दिव्यांगों को 5 अंक छूट, खिलाड़ियों का फ्री सफर
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने गुरुवार को शिक्षा, खेल, समाज कल्याण और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई अहम निर्णय लिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में करीब 26 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
इन फैसलों का असर छात्रों, खिलाड़ियों, अनुसूचित जाति-जनजाति के परिवारों और सरकारी कर्मचारियों समेत कई वर्गों पर पड़ेगा। आगे पढ़िए बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय।
दिव्यांग छात्रों को बोर्ड परीक्षा में पांच अंकों की छूट
उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं में अब दिव्यांगजनों को पांच अंकों की छूट दी जाएगी। कैबिनेट के इस निर्णय से बोर्ड परीक्षा देने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।
समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली निशुल्क कोचिंग के नियम भी बदले गए हैं। इसके लिए परिवार की सालाना आय की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई है। इससे पहले की तुलना में अधिक परिवारों के बच्चे इस सुविधा के दायरे में आ सकेंगे।
ऊधम सिंह नगर जिले के राजकीय आश्रम पद्धति बालिका आवासीय विद्यालय को उच्चीकृत कर हाई स्कूल का दर्जा देने पर भी सहमति बनी। इसके साथ ही डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के ढांचे के पुनर्गठन को स्वीकृति मिली है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हरिद्वार में आरोग्यम विश्वविद्यालय और बीएमएस विश्वविद्यालय नाम से दो निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी दी गई। वहीं पीएम पोषण योजना के तहत अन्नामृत फाउंडेशन को हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में सेंट्रल किचन बनाने के लिए भूमि आवंटन का प्रस्ताव भी पास हुआ।
खिलाड़ियों को रोडवेज बसों में मुफ्त सफर
खेल से जुड़े दो फैसले भी बैठक में हुए। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कार जीत चुके खिलाड़ी अब उत्तराखंड रोडवेज की बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगे।
इसके अलावा प्रदेश के हर जिले में मुख्य खेल प्रशिक्षक की तैनाती की जाएगी, जिससे जिला स्तर पर खिलाड़ियों के प्रशिक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पुल-सड़क निर्माण के लिए अब एक ही स्वीकृति
निर्माण कार्यों की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कैबिनेट ने तय किया है कि पुल और सड़क के लिए अलग-अलग स्वीकृति की जरूरत नहीं होगी। दोनों काम अब एक ही स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ेंगे।
उरेड़ा के ढांचे का पुनर्गठन होगा और वहां कनिष्ठ अभियंता के पदों को उच्चीकृत किया जाएगा। निदेशालय विभागीय लेखा में मिनिस्टीरियल संवर्ग के पदों का पुनर्गठन भी मंजूर हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समूह-ग और समूह-घ के कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली को भी हरी झंडी मिल गई।
स्टांप से जुड़े वादों के निपटारे के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लाने का फैसला भी लिया गया है।
यूसीसी में सुधार और विधेयक को मंजूरी
समान नागरिक संहिता के प्रावधानों में मौजूद लिपिकीय त्रुटि को दूर करने के लिए संशोधन को स्वीकृति दी गई। साथ ही उत्तराखंड विधि संशोधन विधेयक 2026 को अधिनियमित करने पर मुहर लगी।
वर्ष 2000 के अधिनियम में जनजातियों की सूची में दर्ज ‘जन्नासारी’ शब्द को सुधारकर ‘जौनसारी’ करने का प्रस्ताव भी पास हुआ। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग की 2019-22 की वार्षिक रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखने की अनुमति भी दी गई।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब संबंधित विभाग इन फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे, जबकि मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी जाएगी।
