• यात्री पांडुकेश्व व गोविंदघाट में कर रहे हाईवे खुलने का इंतजार
  • 25 यात्री लामबगड़ में पैदल ही एक किलोमीटर चलकर पहुंचे बदरीनाथ 

जोशीमठ/उत्तरकाशी। बुधवार देर रात को हुई भारी बारिश से बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ में भारी मलबा और चट्टान सड़क पर गिरने से रास्ता बंद हो गया है। बदरीनाथ धाम की यात्रा पर जा रहे करीब 100 यात्री भी रास्ता बंद होने से आगे नहीं बढ़ पाए। यात्री पांडुकेश्वर, लामबगड़ और गोविंदघाट में हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
लगातार बारिश से आज बृहस्पतिवार को हाईवे वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं खोला जा सका है।लामबगड़ में बारिश होने पर बार-बार हाईवे पर चट्टान से मलबा और बोल्डर आ रहे हैं। बुधवार रात को हुई बारिश से लगभग दो बजे रात लामबगड़ में हाईवे बंद हो गया। जिससे आज यातायात दिनभर ठप रहा।बदरीनाथ धाम की यात्रा पर जा रहे करीब 80 यात्री लामबगड़ में रुके हुए हैं, जबकि करीब 25 यात्री एक किलोमीटर तक पैदल चलकर बदरीनाथ धाम पहुंच गए हैं। लामबगड़ में हाईवे की स्थिति बेहद खतरनाक बनी हुई है। यहां चट्टान से कब बोल्डर छिटककर हाईवे पर आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
गोविंद घाट के थाना प्रभारी बृज मोहन राणा का कहना है कि क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है। आज बृहस्पतिवार को सुबह से ही यातायात रोका हुआ है। हाईवे सुचारु होने पर वाहनों की आवाजाही करवाई जाएगी। उधर उत्तरकाशी जिले के विभिन्न हिस्सों में बुधवार रात से रिमझिम बारिश जारी है। बारिश में भूस्खलन सक्रिय होने से यमुनोत्री हाईवे खरादी और ओजरी, डबरकोट के पास बंद हो गया है। वहीं, भूस्खलन से अवरुद्ध जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग तीन दिन बाद भी सुरक्षित आवाजाही लायक तैयार नहीं हो पाया है।
आज पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे यहां मलबा साफ कर यातायात बहाल कर लिया गया था, लेकिन दोपहर बाद दोबारा बारिश शुरू होने पर ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन में भूस्खलन सक्रिय होने से हाईवे दोबारा बंद हो गया। हाईवे बंद होने के कारण यमुनोत्री धाम के साथ ही गीठ पट्टी के दर्जनों गांवों का बड़कोट तहसील से संपर्क कट गया है। एनएच विभाग के कर्मचारियों द्वारा मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी से मलबा- पत्थर गिरने के कारण यहां अभी तक यातायात बहाल नहीं हो पाया है। भूस्खलन के कारण दो दिनों तक बाधित रहे जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर लोनिवि ने मलबा साफ कर आवाजाही शुरू तो कर दी है, लेकिन जगह-जगह कीचड़ और सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां आवाजाही खासी जोखिम भरी बनी हुई है।