• प्रदेश में बनाई जा रही है फ्री होल्ड की नीति, सरकारी भूमि का भी हो सकेगा उपयोग

देहरादून। उत्तराखंड सरकार नजूल भूमि पर काबिज करीब डेढ़ लाख लोगों को राहत दे सकती है। सरकार जल्द ही नजूल नीति लाने जा रही है। शासन स्तर पर नीति लाने को लेकर कसरत शुरू हो गई है। हालांकि वर्ष 2009 की नजूल नीति के तहत सरकार ने लीज और कब्जे की भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया आरंभ की थी, लेकिन मामला न्यायालय में चला गया था। तब से सरकार नई नजूल नीति को लेकर असमंजस में रही है।
अब सरकार ने प्रदेश में नजूल नीति लाने का फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नजूल नीति लाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि हम जल्द ही नई नजूल नीति लाने जा रहे हैं। इससे लोगों को राहत मिलेगी। सरकारी भूमि का उपयोग भी हो सकेगा। अधिकारियों को नीति का प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नजूल नीति को तैयार करते समय सभी विधिक और कानूनी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करने को कहा है। सरकार की मंशा है कि नीति इतनी प्रभावी हो कि उसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विधिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नजूल नीति का प्रस्ताव तैयार कर रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में सरकार नजूल की भूमि केवल सरकारी कार्यों के लिए ही आवंटित कर सकती है। नजूल भूमि सरकार के कब्जे की ऐसी भूमि होती है जिसका उल्लेख राजस्व रिकॉर्ड में नहीं है। ऐसी भूमि का रिकॉर्ड निकायों के पास होता है। सचिव आवास शैलेश बगौली ने बताया कि नजूल नीति लाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं, इस पर कार्यवाही चल रही है। इसके सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। 
गौरतलब है कि देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के तराई क्षेत्र में सबसे अधिक नजूल भूमि है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रदेश में 392,204 हेक्टेयर नजूल भूमि है। इस भूमि के बहुत बड़े हिस्से पर डेढ़ लाख से अधिक लोग काबिज हैं। कहीं भूमि लीज पर है तो कहीं इस पर दशकों से कब्जे हैं। सरकार नीति के तहत इस भूमि को फ्री होल्ड कराना चाहती है। वहीं पूर्व में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत भी नजूल नीति लाने को लेकर मुख्यमंत्री से सिफारिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जिस तरह दिल्ली में कब्जेदारों को राहत दी गई, उसी तरह नजूल भूमि को फ्री होल्ड किया जा सकता है।