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इंडिया गठबंधन की बैठक: 2-8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च, 6 को EC तक कूच

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ विपक्ष ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। इंडिया गठबंधन की बैठक में तय हुआ कि 2 से 8 अक्टूबर तक जिलों में “लोकतंत्र बचाओ” मार्च निकाले जाएंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक कूच करेंगे। बैठक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोला।

इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन-कौन पहुंचा

दिल्ली में हुई बैठक में करीब 20 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले जैसे नेता मौजूद रहे, जबकि उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन ऑनलाइन जुड़े। रिपोर्टों के मुताबिक आम आदमी पार्टी, डीएमके और सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस बैठक में नहीं दिखे।

विपक्ष का एक्शन प्लान

बैठक में तय कार्यक्रम के अनुसार 2 से 8 अक्टूबर के बीच जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन और मार्च होंगे। 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। अक्टूबर के मध्य में विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी रैलियां करने की योजना है।

गठबंधन ने यह मांग भी दोहराई कि चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं। खड़गे ने कहा कि सभी दलों में मिलकर लड़ने पर मजबूत सहमति बनी है और प्रदर्शनों के जरिए लोगों को अभियान की वजह समझाई जाएगी।

राहुल गांधी का आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है। उन्होंने कहा, “हम इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उनके मुताबिक यह अभियान जवाबदेही तय होने तक जारी रहेगा। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के तुरंत इस्तीफे की मांग की। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा और चुनाव आयोग का पक्ष

भाजपा ने विपक्ष की बैठक को बिखरे हुए गठबंधन की कवायद बताया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसा कि विपक्ष के पास कोई विजन नहीं, सिर्फ निराशा है। उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लोकतंत्र की शुद्धता के लिए जरूरी बताया और सवाल किया कि मृत मतदाताओं के नाम हटाने पर आपत्ति क्यों है। चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि SIR की पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत चल रही है।

आगे क्या

गांधी जयंती से शुरू हो रहे विरोध कार्यक्रम और 6 अक्टूबर का चुनाव आयोग मार्च तय करेंगे कि विपक्ष इस मुद्दे पर कितनी एकजुटता दिखा पाता है। अक्टूबर के मध्य में राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद आंदोलन की अगली रूपरेखा सामने आएगी।

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