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राघव चड्ढा बीजेपी मंच से बोले- भाजपा ही पंजाब को कर सकती है नशा मुक्त

जालंधर: आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब पंजाब में अपनी पुरानी पार्टी की सरकार पर सीधा निशाना साधा है। राघव चड्ढा बीजेपी की “नशा मुक्त पंजाब यात्रा” के समापन पर जालंधर में हुई रैली में पहुंचे और दावा किया कि अगर कोई दल पंजाब को नशे से मुक्ति दिला सकता है, तो वह केवल भाजपा है। इसी रैली को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संबोधित किया।

राघव चड्ढा बीजेपी मंच पर क्या बोले

चड्ढा ने 13 दिन चली यात्रा को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों में नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती दिखाई है, उसी तरह की इच्छाशक्ति से पंजाब में नशे की समस्या पर काबू पाया जा सकता है। उनका आरोप था कि राज्य सरकार ने नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़े हैं।

यात्रा के दौरान भी चड्ढा ने कहा था कि नशा केवल एक युवा की जिंदगी नहीं, पूरे परिवार को तबाह कर देता है। ये सभी बातें राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर राज्य सरकार का अलग पक्ष है।

13 दिन, 117 सीटें और करीब 4,000 किलोमीटर

भाजपा की यह यात्रा 18 सितंबर को शुरू हुई थी। पार्टी के मुताबिक चार अलग-अलग अभियानों के जरिए करीब 4,000 किलोमीटर का सफर तय किया गया और राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर किया गया। जालंधर की रैली के साथ इसका औपचारिक समापन हुआ।

अमित शाह का वादा: 2029 तक “चिट्टा” मुक्त पंजाब

रैली में अमित शाह ने कहा कि भाजपा को मौका मिला तो 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब से सिंथेटिक नशे “चिट्टा” का कारोबार खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि नशा मुक्त पंजाब पार्टी के चुनाव अभियान का केंद्रीय मुद्दा होगा। शाह ने राज्य की आप सरकार पर नशे के कारोबार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप भी लगाया।

मंच पर आप से भाजपा में आए अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। सुरक्षा एजेंसियों ने रैली स्थल को लेकर मिले धमकी भरे ईमेल के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी थी।

आप ने आरोपों को किया खारिज

पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने भाजपा के आरोपों को नकार दिया है। पार्टी का कहना है कि उसकी सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है और नशा विरोधी अभियान को पहले से मजबूत बनाया है। इन आरोप-प्रत्यारोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आगे क्या

पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के रुख से साफ है कि नशे का मुद्दा आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति के केंद्र में रहेगा, और आप से आए नेताओं को पार्टी इस अभियान के प्रमुख चेहरों के तौर पर आगे कर सकती है।

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