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जान को नया खतरा : कोरोना से ठीक हुए लोगों को अब घेर रहे नये-नये रोग!

विशेषज्ञों का दावा

  • अब एक बीमारी के रूप से जाना जाता है पोस्ट कोविड सीक्वल या पोस्ट कोविड सिंड्रोम  
  • पल्मोनरी एंबोलिज्म, न्यूमोथोरैक्स, स्ट्रोक, वायरल मायोकार्डिटिस से गंवा रहे हैं जान

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना संक्रमित मरीजों की इलाज के दौरान तो मौतें हो ही रही हैं, लेकिन ठीक होने के बाद भी विभिन्न रोगों से लोगों की जान जा रही है। फिलहाल उन मरीजों को भी खतरे की आशंका है, जिन्हें कोविड के दौरान संक्रमण हल्का या मध्यम था।
आकाश हेल्थकेयर के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अक्षय बुद्धराजा का कहना है कि कोविड से ठीक हुए मरीजों को 4 से 6 हफ्ते बाद फिर से दिक्कत हो रही है। उनमें से कुछ की जान पर खतरा भी होता है। पोस्ट कोविड सीक्वल या पोस्ट कोविड सिंड्रोम को एक बीमारी के रूप से जाना जाता है। चिकित्सक ने बताया कि बहुत सारे कोविड से रिकवर हुए मरीज पल्मोनरी एंबोलिज्म, न्यूमोथोरैक्स, वायरल मायोकार्डिटिस और स्ट्रोक की वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं। कुछ मरीजों में सेकंडरी फंगल निमोनिया (अस्पर्जिलोमा) या टीबी भी देखा गया है।
डॉ. अक्षय ने बताया कि गंभीर कोविड इन्फेक्शन से ठीक हुए मरीजों में कई नए रोग पैदा हो रहे हैं। कोविड से रिकवर हुए हर मरीज को अपने फिजिशियन या पल्मोनोलॉजिस्ट से नियमित तौर पर 4 से 8 हफ्तों के बीच जांच कराते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड से ठीक होने वाले को चार से आठ हफ्ते में खून का थक्का बनने से कार्डियक अरेस्ट का भी खतरा रहता है।
बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रेसप्रेट्री डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. संदीप नायर ने कहा कि कई ऐसे मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिन्हें पहले कोरोना तो हल्का था, लेकिन अभी ज्यादा परेशानी हो रही है। उनमें न्यूमोथोरैक्स देखा जा रहा है। इसमें मरीज का लंग्स अचानक पंचर हो जाता है और सांस फूलने लगती है। अभी ऐसे 6 मरीज इलाज के लिए एडमिट हैं।
जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल ढल ने बताया कि जब भी वायरल इन्फेक्शन होता है, तब ऐसा देखा जाता है। कोविड के दौरान यह ज्यादा है। कोरोना वायरस कई बार हार्ट को भी नुकसान पहुंचाता है। अभी ऐसी कोई जांच नहीं है, जिसके बल पर यह पता कर सकें कि किस मरीज को आगे किस प्रकार की हार्ट से जुड़ी परेशानी होगी। विदेशों में माइक्रो आरएनए टेस्ट है, लेकिन अभी यह भारत में नहीं है। कोरोना से ठीक होने के बाद अपने रूटीन काम धीरे-धीरे करें। अचानक एक्सरसाइज या भागदौड़ शुरू न करें। अलर्ट रहना जरूरी है। कोविड से निगेटिव होने का मतलब यह नहीं है कि आप ठीक हो गए। आपको आगे भी खतरा है, कई बार यह खतरा एक से दो महीने तक हो सकता है।
इंडियन स्पाइनल इंजरी के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. असीम  ने बताया कि कोविड के बाद हार्ट की समस्या काफी बढ़ जाती है। जो वायरस है या कोई भी वायरल इन्फेक्शन है, वो हार्ट को भी नुकसान पहुंचाता है। हार्ट अटैक के साथ-साथ हार्ट फेल होने के मामले भी सामने आ रहे हैं। डॉ. असीम ने कहा कि कोविड रिकवरी के बाद यह भी देखा गया है कि किसी मरीज की सांस बढ़ जाती है और किसी की हल्की हो जाती है। अगर हार्ट तेज धड़कता है तो बॉडी की डिमांड-सप्लाई का अनुपात बिगड़ जाता है। कोविड से ठीक होने के बाद मरीजों को कार्डियोलॉजिस्ट से जरूर मिलना चाहिए। 4 से 6 हफ्ते में एक जांच और 6 महीने कार्डियोलॉजिस्ट के संपर्क में रहना जरूरी है।

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