सीरियल किलर डॉ. शैतान का कबूलनामा

  • राक्षस डॉ. देवेंद्र शर्मा ने पुलिस को बताया- एक के बाद एक 50 कत्ल करने के बाद गिनना भूल गया था
  • वर्ष 2004 में पकड़े जाने के बाद 16 साल जयपुर जेल में रहा, फिर अच्छे बर्ताव के लिए मिली पैरोल
  • वह धड़ल्ले से किडनी रैकेट, फर्जी गैस एजेंसी और चोरी की कार बेचने जैसे काले कारनामे करता रहा
  • कैब के ड्राइवरों को मारकर उनके शवों को वह यूपी की नहर में फेंक देता, जिसे वहां मगरमच्छ खा जाते थे

नई दिल्ली। चिकित्सा जैसे पेशे में रहकर निर्दोष लोगों की बेरहमी से जान लेने वाले शैतान देवेंद्र शर्मा के बारे में और चौंकाने वाली जानकारी मिली हैं। जिससे पुलिस में हड़कंप मच गया है। सीरियल किलर डॉ. देवेंद्र शर्मा ने पहले कबूला था कि 50 कत्ल के बाद वह कत्ल की गिनती भूल गया था। पुलिस पूछताछ में अब उसने माना है कि अब तक वह 100 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, जिसमें से ज्यादातर को उसने यूपी के कासगंज की एक नहर में मौजूद मगरमच्छों का खिला दिया।
देवेंद्र शर्मा को बीते बुधवार को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। वह किडनी केस में पिछले 16 साल से जयपुर जेल में सजा काट रहा था और अब पैरोल पर बाहर था। 20 दिन बाद उसे वापस जेल जाना था लेकिन वह अंडरग्राउंड हो गया था। अब पकड़े जाने के बाद उसे काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खुल रहा है। पुलिस के अनुसार देवेंद्र ने एक निवेश में धोखे के बाद उसने जुर्म का रास्ता चुना था। फिर वह डॉक्टरी के साथ-साथ किडनी ट्रांसप्लांट रैकिट, फर्जी गैस एजेंसी भी चलाने लगा। वह चोरी के वाहन भी बेचता था।
अपनी फर्जी गैस एजेंसी के लिए जब उसे सिलेंडर चाहिए होते तो वह गैस डिलिवरी ट्रक लूट लेता और उसके ड्राइवर को मार देता। देवेंद्र कैब ड्राइवरों को उनकी गाड़ियों के लिए मार देता था। दिल्ली से यूपी जाने के लिए इसके गैंग के लोग जिस टैक्सी को बुक करके उसे ही लूट लेते। पकड़े जाने के बाद शर्मा ने बताया कि उसने ज्यादातर शवों को उत्तर प्रदेश, कासगंज के हजारा नहर में फेंक दिया। इस नहर में बड़ी संख्या में मगरमच्छ रहते हैं।
वर्ष 1984 में देवेंद्र शर्मा ने आयुर्वेदिक मेडिसिन में ग्रेजुएशन पूरी करके राजस्थान में क्लीनिक खोला। फिर 1994 में उसने गैस एजेंसी के लिए एक कंपनी में 11 लाख का निवेश किया। लेकिन कंपनी अचानक गायब हो गई। फिर नुकसान के बाद उसने 1995 में फर्जी गैस एजेंसी खोल ली। इसके बाद देवेंद्र ने एक गैंग बनाया जो एलपीजी सिलेंडर लेकर जाते ट्रकों को लूट लेता। इसके लिए वे लोग ड्राइवर को मार देते और ट्रक को भी कहीं ठिकाने लगा देते। इस दौरान उसने गैंग के साथ मिलकर करीब 24 मर्डर किए।
फिर देवेंद्र किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह में शामिल हो गया। उसने सात लाख प्रति ट्रांसप्लांट के हिसाब से 125 ट्रांसप्लांट करवाए। साथ ही साथ ये लोग कैब ड्राइवरों को मारकर उनकी कैब लूट लेते। ड्राइवर की बॉडी को नहर में फेंक दिया जाता था और कैब को यूजड कार बताकर बेच दिया जाता। इसके बाद वह 2004 में पकड़ा गया और 16 साल जयपुर जेल में रहा। फिर अच्छे बर्ताव के लिए उसे जनवरी 2020 को 20 दिन की परोल मिली। लेकिन वह भाग गया और अंडर ग्राउंड हो गया। फिर वह दिल्ली के मोहन गार्डन में छिपकर रहने लगा। यहां वह एक बिजनेसमैन को चूना लगाने वाला था, लेकिन पुलिस को उसके यहां होने की भनक लगी और आखिर में उसे पकड़ लिया गया। अब उसके काले कारनामों का चिट्ठा खुलने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है।