• देवाल के ब्लॉक प्रमुख दर्शन दानू के प्रयासों से जिला पर्यटन अधिकारी ने टीम सहित किया इस रूट का भ्रमण

थराली से हरेंद्र बिष्ट।
पिंडर घाटी के अछूते और बेहद खूबसूरत बुग्यालों में शुमार बगजी, दयार और नागाड़ भी जल्द ही पर्यटकों एवं ट्रैकरो की आमद से गुलजार हो जाने वाले हैं। पिछले दिनों जिला पर्यटन अधिकारी ने क्षेत्र के युवा पंचायत प्रतिनिधियों के साथ इस क्षेत्र का भ्रमण कर रूट मैप बनाने की बात कही है। इससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार की एक नई संभावना दिखने लगी है।
यूं तो पिंडर घाटी में प्राकृतिक पर्यटक स्थलों की किसी भी तरह की कमी नहीं है। यही पर दुनिया के रहस्यमय स्थानों में शुमार “रूपकुंड” इसी क्षेत्र में स्थित है। भारत के सबसे बड़े व खूबसूरत वेदनी बुग्याल भी यही स्थित हैं। इनके अलावा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित भैकलताल, झलताल, सुपताल, ब्रहमताल भी इसी क्षेत्र में हैं। यहां पर ऐसे कई बुग्याल एवं स्थान यहां मौजूद हैं जो स्थानीय लोगों के लिए तो बेहद जाने पहचाने हैं। किंतु देशी, विदेशी पर्यटकों की नजरों से छिपे हैं। जिससे इन खूबसूरत बुग्यालों व स्थानों का दीदार करने के लिए पर्यटक नहीं आ पा रहे हैं।

इन्हीं सुंदर पर्यटन स्थलों एवं ट्रैक में बगजी-दयार-नागाड़ शामिल हैं जो आज तक अधिसंख्यक लोगों की नजरों से ओझल ही बने हुए हैं। दरअसल देवाल विकासखंड के घेस गांव से निकलने वाला यह ट्रैक घने जंगलों, ऊंचे बुग्यालों से होते हुए कैल नदी के उस ओर से पिंडर नदी के इस ओर स्थित नागाड़ को आने के साथ ही वापस देवाल अथवा पड़ोसी जिले बागेश्वर तक जाता है। किंतु प्रचार प्रसार के अभाव में इस ट्रैक पर पर्यटकों की आमद न के बराबर है। हालांकि की जिन क्षेत्रीय प्रकृति प्रेमी लोगों को इस ट्रैक के बारे में जानकारी है, वे गाहे बगाहे इस रूट पर जाते रहते हैं।

पिछले दिनों देवाल के ब्लाक प्रमुख दर्शन दानू के प्रयासों से जिला पर्यटन अधिकारी विजेंद्र पांडेय ने एक टीम के साथ इस रूट का भ्रमण कर इसकी खूबसूरती एवं पर्यटन के हिसाब से लाभ व हानि का आंकलन करने का प्रयास किया तो उन्हें भी लगा कि अगर इस रूट का थोड़ा प्रचार करने के साथ ही रूट पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तो इसका बड़ा लाभ स्थानीय लोगों के साथ ही राज्य सरकार को भी मिल सकता हैं। प्रमुख दर्शन दानू ने बताया कि घेस से नागाड़ तक इस ट्रैक की लम्बाई करीब 14 किमी हैं। जबकि बागेश्वर जिले के तमाम अन्य पर्यटक स्थलों को जाने पर लंबाई 25 किमी से अधिक पड़ेगी। इस ट्रैक पर ट्रैकर तीन, चार दिनों तक घूम कर प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। उन्होंने इस रूट को विकसित करने के लिए पूरा प्रयास करने की बात कही।