उत्तराखंड में 62 स्कूल उच्चीकृत, अब घर के पास ही होगी हाईस्कूल-इंटर की पढ़ाई
देहरादून: उत्तराखंड के दूरदराज इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई अब पहले से आसान होने जा रही है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश के 62 नव उच्चीकृत सरकारी विद्यालयों का वर्चुअल माध्यम से ई-लोकार्पण किया। इसके साथ ही इन स्कूलों में ऊंची कक्षाओं की पढ़ाई विधिवत शुरू हो गई है।
लोकार्पण कार्यक्रम ननूरखेड़ा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की आईसीटी लैब के स्टूडियो से आयोजित किया गया, जहां से मंत्री ने विभिन्न जनपदों के विद्यालयों से ऑनलाइन जुड़कर उन्हें औपचारिक रूप से छात्र-छात्राओं को समर्पित किया।
8 हाईस्कूल और 54 इंटर कॉलेज बने
शिक्षा मंत्री के अनुसार, उच्चीकृत किए गए 62 विद्यालयों में से 8 को हाईस्कूल स्तर और 54 को इंटरमीडिएट स्तर तक बढ़ाया गया है। ये विद्यालय राज्य के सभी 13 जनपदों में फैले हुए हैं।
जिलेवार देखें तो सबसे ज्यादा 8-8 विद्यालय चम्पावत और ऊधमसिंह नगर में उच्चीकृत हुए हैं। हरिद्वार में 7 और नैनीताल में 6 विद्यालयों को यह लाभ मिला है। टिहरी और बागेश्वर में 5-5, पौड़ी और चमोली में 4-4, जबकि रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, देहरादून, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में 3-3 विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया है।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
डॉ. रावत ने बताया कि इन स्कूलों को उच्चीकृत करने की मांग स्थानीय लोग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि काफी समय से कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ के जिबली और चमोली के मानमती में तो ग्रामीणों को इस मांग को लेकर धरने तक पर बैठना पड़ा था।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इन सभी मांगों को पूरा कर दिया है और उच्चीकृत कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के दाखिले भी शुरू कर दिए गए हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश में गुणवत्तापरक शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।
घर के पास पढ़ाई, ड्रॉपआउट घटने की उम्मीद
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब किसी भी बच्चे को आगे की कक्षाओं में पढ़ने के लिए अपने घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। अपने ही क्षेत्र के विद्यालय में उन्हें बड़ी कक्षाओं की पढ़ाई और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालयों के उच्चीकरण से प्रदेश की ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। पहाड़ के दूरस्थ गांवों में नजदीक सुविधा न होने पर कई विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना कठिन हो जाता है, ऐसे में यह कदम उनके लिए राहत माना जा रहा है।
फर्नीचर और शिक्षकों की कमी दूर करने के निर्देश
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रावत ने मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि उच्चीकृत विद्यालयों में फर्नीचर और शिक्षकों की कमी को जल्द दूर किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों से इंटरमीडिएट स्तर तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम हासिल करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
कार्यक्रम में थराली विधायक भोपाल राम टम्टा, गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव, एससीईआरटी निदेशक वंदना गर्ब्याल, माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सिमल्टी और देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं अन्य जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारी, 150 विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, अभिभावक, शिक्षक और जनप्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
अब विभाग की नजर इन विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती, फर्नीचर की व्यवस्था और ड्रॉपआउट शून्य करने की कार्ययोजना पर रहेगी, जिसके लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
