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भाजपा से ग्रीष्मकालीन गैरसैंण का निवाला छीनने की कोशिशें होंगी

  • सीएम त्रिवेंद्र कर चुके ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐतिहासिक फैसला
  • पीआईएल नर सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी घोषित करने से कर दिया है इनकार
  • कोर्ट द्वारा राज्य सरकार पर ही फैसला छोडने के बाद सक्रिय हुए गैरसैंण के ‘पैरोकार’
  • त्रिवेंद्र को श्रेय न मिले, इसके लिए विरोधी आएंगे एक मंच पर

देहरादून। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैरसैंण को राजधानी नहीं बना पाने के बयान के बाद एक बार फिर से गैरसैंण मुद्दा गरमा गया है। इसी बहाने राज्य निर्माण आंदोलनकारी और राजनीतिक दलों से जुड़़े लोग इस मुद्दे को फिर से हवा देने की कोशिशों में जुट गये हैं। इसी कड़ी में 7 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग करके इस पर चर्चा कराने की योजना है। 
उल्लेखनीय है कि 20 साल के इंतजार के बाद इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया था। भराड़ीसैंण में आहूत बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री इसका ‌ऐलान कर देंगे, ऐसी किसी को भनक भी नहीं लगी। विपक्ष तो दूर की बात सरकार के अंदर भी इस बात की कहीं चर्चा तक नहीं थी। सरकार के इस कदम को गैरसैंण को पहाड़ की राजधानी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यकायक हुई इस घोषणा से गैरसैंण की राजनीति करने वालों के साथ समूचा विपक्ष हक्का बक्का रह गया था। नौकरशाही भी मान रही थी यह राज्य गठन के बाद किसी भी सरकार का सबसे साहसिक फैसला था। राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किये बिना जब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह फैसला लिया तो यकायक पर्वतीय क्षेत्र में सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश गया।
यहीं से शुरू हो गयी गैंरसैंण पर राजनीति। विपक्ष विशेषकर सीएम के राजनीतिक विरोधियों ने इसने महत्वपूर्ण फैसले को बेअसर करने के लिए इसे नकारने की कोशिशें शुरू कर दी। विरोधियों ने इसे स्थायी राजधानी के संभावनाऔं को खत्म करने वाला फैसले के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया, ताकि सीएम त्रिवेंद्र को इसका राजनीतिक लाभ न मिल सके और उन्हें इतना बडा फैसला लिये जाने के बाद भी खलनायक साबित किया जाए, इसी उद्देश्य से इस मामले में जनहित याचिका लगायी गयी थी, ताकि कोर्ट से सरकार के फैसले को पलटवा जा सके, लेकिन कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि आम आदमी सीएम त्रिवेंद्र रावत के इस फैसले के निहितार्थ समझते हुए यह भी मान रहा है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी का निर्णय लेना आसान नहीं था। इन सारी स्थितियों को देखते हुए अब गैरसैंण के बहाने से सरकार की घेराबंदी के लिए फिर से सक्रियता बढऩे वाली है। आंदोलनकारियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से चर्चा करने की योजना बनायी है। चिन्हित राज्यआन्दोलनकारी समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप बताया है कि 7 जून को यह कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी।

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