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शादी, तलाक, उत्‍तराधिकार पर उत्तराखंड में UCC से क्‍या बदल जाएगा, जानिए

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश करने के बाद राज्य विधानसभा में विधायकों ने “वंदे मातरम और जय श्री राम” के नारे लगाए गए। दो बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। अब दोबारा सदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा। समान नागरिक संहिता विधेयक पास होने के बाद कानून बन जाएगा। इस बिल के ड्राफ्ट में विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, न्यायिक प्रक्रिया से तलाक समेत मुद्दों को शामिल किया है।

मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं…

इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखंड देश में यूसीसी लागू करने वाला आजादी के बाद पहला राज्य होगा। सूत्रों के अनुसार, मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर करना है।

विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य…

1- विवाह के समय पुरुष की आयु 21 वर्ष पूरी हो और स्त्री की आयु 18 साल हो। विवाह का पंजीकरण धारा 6 के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगेगा।

2- तलाक के लिए कोई भी पुरुष या महिला कोर्ट में तबतक नहीं जा सकेगा, जब तक विवाह की अवधि एक साल न हो गई हो।

3- विवाह चाहे किसी भी धार्मिक प्रथा के जरिए किया गया हो, लेकिन तलाक केवल न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो सकेगा।

4- किसी भी व्यक्ति को पुनर्विवाह करने का अधिकार तभी मिलेगा, जब कोर्ट ने तलाक पर निर्णय दे दिया हो और उस आदेश के खिलाफ अपील का कोई अधिकार नहीं रह गया हो।

5- कानून के खिलाफ विवाह करने पर छह महीने की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा नियमों के खिलाफ तलाक लेने में तीन साल तक का कारावास का प्रावधान है।

6- पुरुष और महिला के बीच दूसरा विवाह तभी किया जा सकता है, जब दोनों के पार्टनर में से कोई भी जीवित न हो।

7- महिला या पुरुष में से अगर किसी ने शादी में रहते हुए किसी अन्य से शारीरिक संबंध बनाए हों तो इसको तलाक के लिए आधार बनाया जा सकता है।

8- अगर किसी ने नपुंसकता या जानबूझकर बदला लेने के लिए विवाह किया है तो ऐसे में तलाक के लिए कोई भी कोर्ट जा सकता है।

9- अगर पुरुष ने किसी महिला के साथ रेप किया हो, या विवाह में रहते हुए महिला किसी अन्य से गर्भवती हुई हो तो ऐसे में तलाक के लिए कोर्ट में याचिका लगाई जा सकती है। अगर महिला या पुरुष में से कोई भी धर्मपरिवर्तन करता है तो इसे तलाक की अर्जी का आधार बनाया जा सकता है।

10- संपत्ति को लेकर महिला और पुरुषों के बीच बराबर अधिकार होगा। इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा इच्छा पत्र और धर्मज को लेकर भी कई तरह के नियम भी शामिल हैं।

बहुविवाह पर लगेगी रोक…

कुछ कानून में बहु विवाह करने की छूट है। चूंकि हिंदू, ईसाई और पारसी के लिए दूसरा विवाह अपराध है और सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसलिए कुछ लोग दूसरा विवाह करने के लिए धर्म बदल लेते हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लगेगी। बहुविवाह पर भी पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

किस पर होगा लागू:- राज्य के मूल निवासी व स्थाई निवासियों पर, राज्य सरकार या उसके किसी उपक्रम के वे स्थाई कर्मचारी जो राज्य की सीमा में तैनात हों, राज्य में कम से कम एक वर्ष से निवास कर रहे हों, ऐसे व्यक्तियों पर ये एक्ट लागू होगा।

ये अहम प्रावधान भी…

समान नागरिक संहिता में किसी भी वर्ग के अनुष्ठानों सेरेमनी एंड रिचुअल्स पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह,पवित्र बंधन, आनंद कारज, आर्य समाजी विवाह, विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत विवाह आदि अनुष्ठानों को यूसीसी में छेड़ा नहीं गया है।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जिस लेवल पर जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं, उन्ही स्तरों पर शादी का रजिस्ट्रेशन होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिविबौर शहरी एरिया में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड में उन सभी बच्चों को उसे दंपति का बायोलॉजिकल चाइल्ड माना जाएगा जिसमें दत्तक, नाजायज, सरोगेसी या टेस्ट ट्यूब बेबी द्वारा जनित बच्चे शामिल हैं।

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