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ऐतिहासिक फैसला : आज के दिन ही समर कैपिटल बना था गैरसैंण, त्रिवेंद्र ने जारी किया वीडियो

देहरादून। आज 4 मार्च यानी शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो शेयर किया है। यह वीडियो ठीक दो साल पहले यानी 4 मार्च, 2020 का है जब सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण विस भवन में इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की थी।
उस समय त्रिवेंद्र ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए उत्तराखंड के लोगों की जनभावनाओं से जुड़ा फैसला बताया था। आखिरकार चमोली जिले के अंतर्गत भराड़ीसैंण (गैरसैंण) आधिकारिक रूप से प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा कर उन्होंने कांग्रेस को बैक फुट पर ला दिया था। उत्तराखंड राज्य को आखिरकार जनभावनाओं की राजधानी मिल ही गई। भराड़ीसैंण में बजट सत्र के दौरान सदन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अचानक भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा कर विपक्ष समेत गैर भाजपा दलों को चौंका दिया था। भराड़ीसैंण में दो दिन तक जश्न का माहौल रहा था।

इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिसूचना जारी होने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि भराड़ीसैंण को आदर्श पर्वतीय राजधानी का रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि बीती 4 मार्च को भराड़ीसैंण में बजट सत्र के दौरान की गई यह घोषणा सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान है। भराड़ीसैंण को ई-विधानसभा के रूप में विकसित करने पर कार्य हो रहा है।
दरअसल गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग आज की नहीं है। बल्कि साठ के दशक में पहली बार इसे स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठी थी। ये मांग पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने उठाई थी। यही वजह रही कि उत्तराखंड क्रांति दल ने उस दौर में गैरसैंण को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर चंद्रनगर रखा था। हालांकि यूपी से एक अलग राज्य उत्तराखंड बनाने के साथ ही उसकी राजधानी गैरसैंण को बनाने की मांग उठने लगी थी। राज्य आंदोलनकारियों और यूकेडी ने भी इसको लेकर कई बार आंदोलन तेज किया, जिसके बाद उनका ये आंदोलन नौ नवंबर 2000 को खत्म हुआ और उत्तर प्रदेश से एक अलग राज्य उत्तराखंड का निर्माण हुआ।
इसके बाद उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण न होकर देहरादून (अस्थाई) बन गई। इसे लेकर फिर से आंदोलन शुरू हुए और राज्य आंदोलनकारियों ने ‘पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ हो’ का नारा बुलंद किया। इसलिए गैरसैंण को जनभावनाओं की राजधानी भी कहा जाने लगा। गैरसैंण की धरती पर राजधानी के लिए कई आंदोलन शुरू हुए और समय के साथ राजधानी की मांग तेज होती चली गई। उत्तराखंड में सरकारें बनी और सभी ने यहां की जनता को गैरसैंण राजधानी का सपना भी दिखाया, जो सिर्फ सपना ही बनकर ही रह गया था। फिर इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक दल हमेशा अपनी रोटी सेकने में लगे रहे।
कांग्रेस सरकार के शासनकाल में गैरसैंण राजधानी की उम्मीदें फिर प्रबल हुई और तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने यहां विधानसभा भवन, सचिवालय, ट्रांजिट हॉस्टल और विधायक आवास का शिलान्यास किया। इसके बाद पूर्व सीएम हरीश रावत के कार्यकाल के दौरान ये बनकर तैयार हुए। आखिरकार त्रिवेंद्र के नेतृत्व में 4 मार्च, 2020 में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर इस मुद्दे पर विराम लगा दिया गया। 

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