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उत्तराखंड : खाद्य विभाग में मंत्री पर भारी पड़ रहे नौकरशाह!

आमने-सामने

  • मंत्री रेखा आर्य ने कहा, खाद्य आयुक्त ने उनके अनुमोदन के बिना नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी को अनिवार्य छुट्टी पर भेजा
  • खाद्य सचिव एवं आयुक्त सचिन कुर्वे ने कहा, इस मामले में उनसे जो जानकारी मांगी गई थी, उसे विभागीय मंत्री को लिखित में अवगत कराया

देहरादून। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में विभागीय मंत्री रेखा आर्य के अनुमोदन के बिना विभागीय सचिव की ओर से नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज वर्मन को अनिवार्य छुट्टी पर भेजने और छह जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादलों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। खाद्य मंत्री ने इस मामले में सचिव सचिन कुर्वे की गोपनीय प्रविष्टि से संबंधित मूल पत्रावली तलब की है।
रेखा आर्य ने सचिव कार्मिक को पत्र लिखकर खाद्य विभाग के सचिव एवं आयुक्त सचिन कुर्वे की गोपनीय प्रविष्टि से संबंधित मूल पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। मंत्री ने कहा कि 20 जून को खाद्य आयुक्त ने उनके अनुमोदन के बिना नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी को अनिवार्य छुट्टी पर भेजा। इस पर उन्होंने इस आदेश को रद्द करने एवं इस पर उनका अनुमोदन कराने के लिए उनका जवाब तलब किया था।
इसके बावजूद खाद्य आयुक्त व विभागीय सचिव ने उनके निर्देश को मानने के बजाय उसी दिन उनके अनुमोदन के बिना छह जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादले कर दिए। तबादले इतनी जल्दबाजी में किए गए हैं कि इससे संबंधित बैठक के कार्यवृत्त में 22 जून 2022 की तिथि के बजाय 22 जून 2019 की तिथि लिखी गई है। संबंधित अधिकारियों ने भी बिना देखे इस पर हस्ताक्षर कर दिए।खाद्य आयुक्त ने उनके कार्यालय में सम्बद्ध श्याम आर्य का पिथौरागढ़, मुकेश कुमार को हरिद्वार, देहरादून के जिला पूर्ति अधिकारी जसवंत सिंह कंडारी का चमोली, हरिद्वार के जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल का रुद्रप्रयाग, नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज वर्मन को बागेश्वर और रुद्रप्रयाग के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज डोभाल का नैनीताल तबादला किया है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा कि विभाग में जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादलों के लिए तबादला प्रक्रिया को अपनाए बिना आनन-फानन में तबादले किए गए हैं। तबादलों के लिए पात्र अधिकारियों की विभाग की वेबसाइट पर न सूची जारी हुई न ही संबंधित अधिकारियों से तबादलों के लिए दस विकल्प लिए गए। मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि तबादलों में पारदर्शिता के लिए सरकार की ओर से तबादला एक्ट बनाया गया है। एक्ट के मुताबिक 30 अप्रैल तक विभागाध्यक्ष को मानक के अनुसार कार्यस्थल चिह्नित करने थे, एक मई तक शासन, विभागाध्यक्ष, मंडल और जिला स्तर पर तबादला समितियों का गठन होना था, 15 मई तक हर संवर्ग के लिए सुगम और दुर्गम स्थल तय होने थे। 20 मई तक अनिवार्य तबादलों के लिए पात्र कार्मिकों से 10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प मांगे जाने थे। 31 मई तक अनुरोध के आधार पर आवेदन मांगे जाने थे।
उन्होंने बताया कि 25 से पांच जुलाई तक तबादला समिति की बैठक होनी थी। इसके बाद 10 जुलाई तक तबादला आदेश जानी होना था, लेकिन विभागीय सचिव ने तबादला एक्ट के मुताबिक प्रक्रिया को अपनाए बिना सारी कार्रवाई मात्र डेढ़ घंटे में पूरी कर दी। मंत्री ने कहा कि आयुक्त व सचिव की ओर से एक्ट में दी गई प्रक्रिया का पालन न कर इसका उल्लंघन किया गया है। विभागीय मंत्री का यह दायित्व है कि यदि उसे विभाग के किसी भी निर्णय में कहीं से भी किसी निजी स्वार्थ व भ्रष्टाचार की आशंका हो तो ऐसे आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर देना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि इस मामले में सचिव व आयुक्त ने न सिर्फ अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के अधिकारों का हनन किया बल्कि सरकार के तबादला एक्ट का उल्लंघन किया है। वहीं विभागीय मंत्री के आदेशों की अनदेखी की गई है।
रेखा ने कहा कि इस मामले में सचिव ने उनके निर्देश की अनदेखी की है। जिससे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अवगत करा दिया गया है। मुख्यमंत्री दिल्ली में हैं। उनके सामने पूरी स्थिति रखी गई है।
खाद्य मंत्री के निर्देश के बाद भी अब तक छह जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादले रद्द नहीं हुए। मंत्री ने कहा कि विभाग में उनके आदेश की अनदेखी की जा रही है। उधर
खाद्य सचिव एवं आयुक्त सचिन कुर्वे के मुताबिक सभी अधिकारियों के तबादले तबादला एक्ट के तहत किए गए हैं। विभागीय मंत्री की ओर से इस मामले में उनसे जो जानकारी मांगी गई थी। बृहस्पतिवार को उससे विभागीय मंत्री को लिखित में अवगत करा दिया गया है।
गौरतलब है कि नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज वर्मन को 10 दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेजने से विभागीय मंत्री नाराज हैं। इसके बाद अधिकारियों के तबादलों से पूरे प्रकरण ने तूल पकड़ा हुआ है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नैनीताल जिले में कई दुकानों में बिना बायोमीट्रिक के लोगों को राशन दिया जा रहा था। हाल ही में हुई बैठक में इस प्रकरण का खुलासा हुआ था। बताया गया कि 26 राशन की दुकानों में बायोमेट्रिक प्रतिशत शून्य था। जबकि 163 दुकानों में बायोमेट्रिक प्रतिशत मात्र 15 से 17 फीसदी था। इस पर विभागीय सचिव ने संबंधित जिला पूर्ति अधिकारी को दस दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेजा था। जो खाद्य मंत्री को नागवार गुजरा है।

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