Saturday , December 10 2022
Breaking News
Home / उत्तराखण्ड / रुद्रप्रयाग : जिला अस्पताल के शौचालय में नाबालिग ने दिया बच्चे को जन्म, जच्चा-बच्चा दोनों की मौत से उठे सवाल!

रुद्रप्रयाग : जिला अस्पताल के शौचालय में नाबालिग ने दिया बच्चे को जन्म, जच्चा-बच्चा दोनों की मौत से उठे सवाल!

रुद्रप्रयाग। जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग के शौचालय में एक नाबालिग ने एक बच्चे को जन्म दे दिया, लेकिन बच्चे को जन्म देने के बाद ही नवजात और नाबालिग की मौत हो गई। पूरे घटनाक्रम में जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों और नाबालिग की मां की लापरवाही भी सामने आई है। हैरत की बात यह है कि चिकित्सकों को नाबालिग के प्रसव पीड़ा से ग्रसित होने की जानकारी नहीं लगी। वहीं नाबालिग की मां ने बदनामी की डर से सारी बातें चिकित्सकों से छुपाए रखी। अब मामले में चिकित्सालय प्रबंधन ने जांच बैठा दी है।
गौरतलब है शुक्रवार दोपहर एक नाबालिग को उसकी मां उपचार कराने को लेकर जिला चिकित्सालय पहुंची थी, लेकिन नाबालिग की मां ने चिकित्सकों को यह नहीं बताया कि वह प्रसव पीड़ा से ग्रसित है। चिकित्सक भी नाबालिग का सामान्य उपचार करते रहे। बताया जा रहा है कि देर रात नाबालिग की मां ने जिला चिकित्सालय में अपनी बेटी का शौचालय में प्रसव कराया। प्रसव के बाद नाबालिग की मौत हो गई। आज शनिवार सुबह के समय चिकित्सालय के शौचालय में सफाई कर्मियों को एक नवजात भी मृत पड़ा मिला।
बताया जा रहा है कि नाबालिग जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव की ही थी। डॉक्टरों के अनुसार नाबालिग की मौत प्रसव के बाद अत्यधिक रक्त बहने से हुई है। अगर नाबालिग की मां चिकित्सकों को सारी सच्चाई बता देती तो शायद नाबालिग की जान बच सकती थी। उधर जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. राजीव सिंह ने बताया कि शुक्रवार दोपहर के समय एक किशोरी को लेकर उसकी मां जिला चिकित्सालय पहुंची थी। जांच करने पर पता चला कि उसमें हीमोग्लोबिन की कमी है।  चिकित्सक उसे आगे के लिये रेफर कर रहे थे, लेकिन नाबालिग की मां ने मना कर दिया। उसने लिखित रूप में कहा कि उसका उपचार यहीं किया जाए।
डॉ. राजीव सिंह के अनुसार रात के समय नाबालिग ने बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद उपचार न मिलने के कारण नाबालिग की भी मौत हो गई। अगर परिजन चिकित्सकों को सही बात बताते तो नाबालिग को बेहतर उपचार मिलता। वहीं पूरे मामले की पुलिस और अस्पताल प्रबंधन जांच कर रहे हैं। वहीं ये सवाल भी उठ रहे हैं कि कि अस्पताल के डॉक्टरों को कैसे नहीं पता चला कि मामला कुछ असामान्य है। बच्ची की स्थिति जांचने के बाद उन्होंने परिजनों से सवाल क्यों नहीं किए। क्या डॉक्टरों की पारखी नजर भी नहीं भांप सकी कि बच्ची गर्भवती है। 

About team HNI

Check Also

सरकार का यू टर्न : माना- रामदेव की दवाओं पर बैन यानी गलती से हुई ‘मिस्टेक’!

अब आयुर्वेद विभाग ने हटाई दिव्य फार्मेसी की पांच दवाओं के उत्पादन पर लगाई गई …

Leave a Reply