देहरादून। आज भारत ज्ञान विज्ञान समिति के तत्वावधान में सामुदायिक भवन गढ़वाली कालोनी देहरादून में समिति की बैठक आयोजित की गई । बैठक में अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति की संयुक्त पहल भारत का भविष्य अभियान के मुद्दे सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता, क्लाइमेट चेंज, आजीविका, महिला सुरक्षा, सार्वजनिक शिक्षा एवं जन स्वास्थ्य आदि पर व्यापक जागरूकता के लिए उत्तराखण्ड में जिला एवं गांव तक चलाने के सम्बंध में सामूहिक चर्चा की गई। इस अवसर पर अभियान का पोस्टर भी रिलीज किया गया।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष विजय भट्ट एवं संचालन महासचिव कमलेश खंतवाल ने किया। बैठक में सोहन रावत, सतीश धौलखण्डी, इंद्रेश नौटियाल, टीएस रावत उमा भट्ट, अनुष्का, कुल बहादुर कार्की कन्हैया लाल, मदन ठाकुर उमा नौटियाल, यासीन मिहम्मद, सनवर अली, स्वाति नेगी अग्रिम सुंदरियाल, मनीष विष्ट, ज्योत्स्ना जोशी, विशेश्वरी नेगी, आदि सदस्य शामिल थे। बैठक में शामिल सदस्यों का जिला सचिव सनवर अली ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
बैठक में भारत का भविष्य जन अभियान सम्बंधित प्रेस नोट जारी करते हुए सामूहिक रूप से अभियान का पोस्टर रिलीज किया गया।
भारत का भविष्य – जो है उससे बेहतर चाहिए- जनअभियान, मार्च 2026- मई 2027
विषय- सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता के लिए अभियान।
आयोजक-अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क और भारत ज्ञान विज्ञान समिति उत्तराखण्ड
- बैठक में भारत का भविष्य अभियान का संदर्भ प्रस्तुत करते हुये बताया गया कि जिस तरह से वर्तमान समय में भारत का भविष्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है उसमे मुख्यरूप से कारपोरेट केन्दित विकास, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तथा सरकार का एकाधिकार वाद की बात पर जोर दिया जा रहा है जबकि हम लोग वैज्ञनिक चेतना, समानता, समाजिक न्याय, बहुलतावाद एवं जन केन्दित विकास करना चाहते है।
- यह अभियान क्यों – सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण, बेरोजगारी की बढ़ती हुई संख्या, कृषि और आजिविका का संकट, घटती खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण का क्षय, असुरक्षित जलवायु जिसमे बढ़ता तापमान और प्रदुषण जिसका असर गरीबों की ज़िदगी पर सीधा पड़ रहा है।
- आत्मनिर्भर विकास के स्थान पर विदेशी प्रौद्योगिकी एवं उसके आयात पर बढ़ती निर्भरता आदि मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे है। नागरिकों के बीच अंधविशवास व छद्म विज्ञान को बढ़ाना, विज्ञान को सांम्प्रदायिक विचारो मे शामिल करना, इतिहास को तोड़ मरोड़कर परोसा जा रहा है। वैज्ञानिक चेतना पर प्रहार किया जा रहा है।
- सामाजिक ध्रुवीकरण अच्छे विचार रखने वाले एवं काम करने वाले लोगों का दमन किया जा रहा है। संस्थानो पर एकाधिकारवाद थोप कर भारत कि विविधता और बहुलतावादी संस्कृति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
जन विज्ञान आन्दोलन ने इस प्रसंग को ध्यान मे रखते हुए एक लोकप्रिय विकल्प की आवश्यकता महसूस की है। इसकी पूर्ति के लिए 2014 के बाद से भारत को किस तरह बनाया जा रहा है, इस समझ के आधार पर, संस्कृति शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार; अजिविका और वैज्ञानिक चेतना जैसे विषयों को लेकर जन अभियान चलाया जायगा। इन विषयों के बारे मे आम आदमी कि क्या समझ है, उसको सीखना और वैकल्पिक कार्यक्रम के बारे मे समझने कि कोशिश करेगे।
यह जन अभियान एक वर्ष तक 1 मई 2026 से 10 मई 2027 तक चलाया जायेगा।
वर्तमान विकास की दिशा व दशा का आंकलन करना –
शिक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आजिविका का ग्राम, विकासखण्ड, जिला एवं राज्य स्तर पर सर्वेक्षण कर उसकी रिपोर्ट सांझा करना। जिसमें कल्चरल व सामाजिक सुरक्षा की शासकीय योजनाओं की स्थिति को भी जेाड़ा जाएगा। कल्चरल विषय पर कला जत्था 02 अक्टूबर से 14 नवम्बर तक शुरू किया जाना है
उत्तराखण्ड के संदर्भ में हम कन्टेट तैयार कर साझा किया जाएगा। उसके हिसाब से अलग अलग तरह के समूह तैयार किये जायेंगे। कला जत्था के लिए नाटक की स्क्रिप्ट तैयार की जाएगी। एसेसमेन्ट रिपोर्ट के आधार पर राज्य जिला एवं पंचायत स्तर तक जन संवाद आयोजित होगा। प्रदर्शनी तैयार करना, इसमे क्या क्या मुद्दे शामिल किये जा सकते है उसकी सामग्री तैयार करेंगे। विषय आधारित, छोटी छोटी पुस्तके तैयार की जायेगी और उनको जन वाचन कार्यक्रम मे शामिल किया जायेगा। सोशल मिडिया के लिये समूह बनांकर सामग्री तैयार की जाएगी। विभिन्न जन संगठनों को शामिल करते हुए जिला एवं राज्य आयोजन समितियों का गठन किया जाएगा।
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