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उत्तराखंड भाजपा सरकार का बड़ा ऐलान, जंगलों की आग बुझाने वाले को 1 लाख इनाम…

देहरादून। उत्तराखंड में वनाग्नि आज भी वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राहत की बात यह है कि बीते सालों की तुलना में साल 2026 में वनाग्नि की ज्यादा घटनाएं नहीं हुई हैं। इसके बाद भी प्रदेश के जंगलों में आग लगने की घटनाओं की संभावना बनी हुई है।

वन विभाग जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वनों में अग्नि नियंत्रण के लिए सरकार पूरी गंभीरता से कदम उठा रही है। अग्नि नियंत्रण में जनसमुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया रहा है। इसी क्रम में ग्राम स्तर पर गठित 496 वनाग्नि प्रबंधन समितियों को 30-30 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।

इसके साथ ही सरकारी व निजी स्तर पर वनों को आग से बचाने में उल्लेखनीय योगदान देने समूहों व व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक जिले में दोनों श्रेणियों में तीन-तीन पुरस्कार दिए जाएंगे, जिसमें एक लाख, 75 हजार व 50 हजार रुपये धनराशि प्रदान की जाएगी।

वन मंत्री उनियाल ने कहा कि कोविडकाल में वनों में आग की घटनाएं न्यूनतम रहीं। अध्ययन कराया गया तो बात सामने आई कि आग का ज्यादातर कारण मानवजनित है। इसे देखते हुए जनजागरूकता पर विशेष बल दिया जा रहा है और राज्य में अभी तक 3500 से ज्यादा जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विषम भूगोल के चलते रिस्पांस टाइम बड़ी समस्या है। ऐसे में वनकर्मियों के मौके पर पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोग तत्काल आग बुझाने में जुट जाएं तो इससे बड़ी राहत मिलेगी।

आग बुझाने में जुटे हैं 11,650 कर्मी

वन मंत्री ने बताया कि जंगलों में अग्नि नियंत्रण के लिए 11,650 कर्मी दिन-रात जुटे हैं। इनमें 6025 विभागीय कार्मिक और 5625 फायर वाचर हैं। इसके साथ ही हर जिले में वरिष्ठ अफसरों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

पिरुल को आजीविका से जोड़ा

जंगलों में आग के फैलाव का बड़ा कारण पिरुल यानी चीड़ की सूखी पत्तियां हैं। इन्हें आजीविका से जोड़ा गया है। वन मंत्री ने कहा कि पिरुल एकत्रीकरण के लिए अब ग्रामीणों को दो के स्थान पर 10 रुपये प्रति किग्रा की दर से भुगतान हो रहा है। इस वर्ष 8555 टन पिरुल एकत्रीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

पिरुल से ब्रिकेट बनाने की इकाइयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में नौ इकाइयां संचालित हैं। पिरुल के अन्य उपयोग के दृष्टिगत केंद्र सरकार के स्तर पर भी बातचीत चल रही है। इसके अलावा 11217 वन पंचायतों में जड़ी-बूटी व सगंध खेती के दृष्टिगत 628 करोड़ का हर्बल मिशन चल रहा है।

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