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उत्तराखंड : मलारी हाईवे की पहाड़ी में आईं दरारें, सातवें दिन भी कटा रहा 16 गांवों का संपर्क

जोशीमठ। आज शुक्रवार को सातवें दिन भी भारत-चीन सीमा पर जोशीमठ-मलारी हाईवे बंद पड़ा हुआ है। आज  नीती घाटी में हेली सेवा शुरू होनी थी, लेकिन मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर गौचर से उड़ान नहीं भर पाया। चमोली जिले में देर रात से हो रही बारिश अभी भी जारी है।
इससे नीती घाटी के 16 गांव देश-दुनिया से कटे हुए हैं। सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही भी बंद है। सात दिनों से क्षेत्र में बिजली और संचार सेवा भी ठप है। बृहस्पतिवार को नीती घाटी में खाद्य सामग्री लेकर जा रहा हेलीकॉप्टर खराब मौसम के कारण आधे रास्ते से लौट गया था। जो आज भी मौसम ठीक होने के इंतजार में है। मलारी हाईवे पर हो रहे भूस्खलन की स्थिति का जायजा लेने के लिए बीआरओ की सर्वे टीम मौके पर पहुंची। टीम ने देखा कि पहाड़ी पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भूस्खलन लंबे समय तक जारी रह सकता है।
जोशीमठ-मलारी हाईवे पर बीते 14 अगस्त की शाम को सुराईथोटा और तमक के बीच भूस्खलन होने से यातायात बंद हो गया था। यहां अब भी लगातार भूस्खलन जारी है। भलगांव के ग्राम प्रधान लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि देश के सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाला हाईवे सात दिनों से ठप पड़ा हुआ है।

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