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आखिरकार झुक गया चीन, सैनिक हटाने पर हुआ सहमत

रंग लाई ले. जनरल स्तर की बातचीत

  • लद्दाख में तनाव वाले इलाके में एलएसी पर फिर बीती 5 मई जैसी स्थितियों फिर होंगी बहाल
  • भारत और चीन में एक महीने से ज्यादा वक्त से लद्दाख में तनाव पर फिलहाल विराम
  • गलवान घाटी में चीन और भारतीय सेना के बीच संघर्ष में शहीद हो गए थे भारत के 20 जवान
  • चीन के भी 40 जवान मारे गए थे, तब से दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव में बीते सोमवार को कुछ कमी आती दिखी। कल हुई दोनों देशों के जनरल स्तर पर बातचीत के दौरान ड्रैगन पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले इलाके से अपने सैनिकों को हटाने पर सहमत हो गया है। गौरतलब है कि गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन के भी 40 जवान मारे गए थे। इस घटना के बाद दोनों देशों के तनाव चरम पर पहुंच चुका है।
सूत्रों ने बताया कि वार्ता में पूर्वी लद्दाख से सैनिकों के हटाने के लिए तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बातचीत के दौरान भारत की ओर से साफ कह दिया गया कि एलएसी में जैसी स्थिति 5 मई के पहले थी, वैसे ही होनी चाहिए। यानी कि भारत की ओर से साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि चीन अपनी सीमा पर वापस लौटे।
दोनों पक्षों के बीच उसी जगह पर छह जून को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की पहले दौर की बातचीत हुई थी, जिसके दौरान दोनों पक्षों ने गतिरोध दूर करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया था। हालांकि 15 जून को हुई हिंसक झड़पों के बाद सीमा पर स्थिति बिगड़ गई, क्योंकि दोनों पक्षों ने 3,500-किलोमीटर की वास्तविक सीमा के पास अधिकांश क्षेत्रों में अपनी सैन्य तैनाती को काफी तेज कर दिया।
भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी खींचतान के बीच सोमवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई थी। भारतीय पक्ष का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर ने किया था। एलएसी के दूसरी ओर चीन के हिस्से में मोल्डो इलाके में दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। यह बैठक करीब 12 घंटे के बाद खत्म हुई।
सूत्रों के अनुसार सोमवार को हुई कोर कमांडर स्तर की मीटिंग सकारात्मक माहौल में हुई। बैठक में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने पर सहमति बनी। तनाव वाले क्षेत्र से दोनों पक्ष सेना हटाने को लेकर सहमत थे। पूर्वी लद्दाख में जिन-जिन जगहों पर गतिरोध है, वहां डिसइंगेजमेंट कैसे किया जाएगा, इसकी प्रक्रिया पर बात हुई।
भारत ने लद्दाख के फिंगर 4 पर चीन के सैनिकों के जमावड़ें पर कड़ा ऐतराज जताया था। भारत ने चीन से साफ कहा कि इस इलाके से ड्रैगन को अपने सैनिकों को हटाने ही होंगे और उसे अपने पूर्व की स्थिति पर लौटना होगा। बता दें कि भारत ने चीन के विरोध के बाद भी लद्दाख में अपनी सीमा में तेजी से सड़क बना रहा है।
गलवान घाटी में चीन के धोखे के बाद भारत पूरी तरह से सतर्क हो गया है। लद्दाख से लेकर सिक्किम तक चीन की सीमा से लगने वाली एलएसी पर भारतीय सेना पूरी तरह से सतर्क है और चीन की किसी भी हिमाकत का जवाब देने के लिए उसे खुली छूट मिल चुकी है। भारत ने इन इलाकों में लड़ाकू विमानों से लेकर हैवी मशीनगनें तक तैनात कर दी हैं।

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