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मोदी ने जिन 6 राज्यों में लौटे मजदूरों के लिए शुरू की महायोजना, उनमें उत्तराखंड नहीं

गरीब कल्याण रोजगार अभियान बिहार से शुरू  

  • बिहार के सबसे ज्यादा जिले इस योजना में शामिल करने की वजह वहां इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव
  • योजना का बजट 50 हजार करोड़, कामगारों को स्किल के हिसाब से मिलेंगे 25 काम, पक्के घर बनेंगे, जल-जीवन मिशन को आगे बढ़ाएंगे
  • गरीब कल्याण रोजगार अभियान 125 दिनों का होगा, इसे देश के 116 जिलों में चलाया जाएगा, इससे 25 हजार से ज्यादा प्रवासी कामगारों को फायदा मिलेगा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को गरीब कल्याण रोजगार अभियान की बिहार के खगड़िया जिले के तेलिहार गांव से शुरुआत की। मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत लद्दाख में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ की। उन्होंने कहा कि शहीदों को परिवारों को भरोसा दिलाता हूं कि पूरा देश उनके साथ है। माना जा रहा है कि बिहार से योजना शुरू करने की वजह राज्य में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं।
मोदी ने कहा कि जब कोरोना महामारी का संकट बढ़ना शुरू हुआ तो आप सभी लोग राज्य और केंद्र सरकार की चिंताओं में बने हुए थे। हमने अपने श्रमिक भाई बहनों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलाईं। कोरोना का इतना बड़ा संकट, जिसके कारण दुनिया सहम गई, लेकिन आप डटकर ठहर गए। भारत के गांवों ने कोरोना का जिस तरह मुकाबला किया है उसने शहरों को भी सबक दिया है। कोरोना संक्रमण को गांव के लोगों ने बहुत ही प्रभावी तरीके से रोका है। गांवों की जनसंख्या 80-85 करोड़ हैं, जो पूरे यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा है। इस जनसंख्या का कोरोना से मुकाबला करना बहुत बड़ी बात है। पंचायत तक हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं, चिकित्सा सुविधाएं, वेलनेस सेंटर स्वच्छता अभियान की अहम भूमिका रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नई मशीन से हर दिन कोरोना के 1500 टेस्ट होंगे। परसों से पटना में कोरोना टेस्टिंग की बड़ी आधुनिक टेस्टिंग मशीन शुरू होने वाली है। इस मशीन से हर दिन करीब 1500 टेस्ट संभव होंगे। आज गरीब के कल्याण के लिए उसके रोजगार के लिए बहुत बड़ा अभियान शुरू हुआ है। यह हमारे श्रमिक भाई-बहनों के लिए गांव में रहने वाले नौजवानों को समर्पित हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं, जो लॉकडाउन में अपने गांव लौटे हैं।
मोदी ने कहा कि इस काम की प्रेरणा श्रमिक साथियों से ही मिली। बोले, मैंने एक उत्तर प्रदेश की एक खबर देखी। वहां कुछ श्रमिक क्वारंटाइन में रखे गए थे। इन्हें रंगाई-पुताई और पीओपी के काम में महारत थी। उन्होंने सोचा कि पड़े रहेंगे, इससे कुछ हुनर का इस्तेमाल करें। उन्होंने स्कूल को रंगाई-पुताई करके बढ़िया बना दिया। इसने मेरे मन को प्रेरणा दी। तभी इस योजना का आइडिया आया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर भी बनेंगे। कहीं शेड बनाए जाएंगे। कहीं जल-जीवन मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। कहीं जरूर है, सड़कों के निर्माण पर भी उतना ही जोर दिया जाएगा। जहां पंचायत भवन नहीं हैं, वहां पंचायत भवन भी बनाए जाएंगे। साथ-साथ इस अभियान से आधुनिक सुविधाओं से भी गांवों को जोड़ा जाएगा। गांव में सस्ता और तेज इंटरनेट होना जरूरी है, ताकि हमारे बच्चे पढ़ सकें। गांव में शहरों से ज्यादा इंटरनेट इंस्तेमाल हो रहा है। गांव में फाइबर केबल पहुंचे, इससे जुड़े काम भी होंगे। ये काम गांव के ही लोग करेंगे। आप लोग ही करेंगे। इसका मकसद कामगारों को उनकी रुचि और कौशल के तहत रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि इस योजना में 6 राज्यों के 116 जिले शामिल हैं। जिनमें बिहार के 32, उत्तर प्रदेश के 31, मध्य प्रदेश के 24, राजस्थान के 22, ओडिशा के 4 और झारखंड के 3 जिले शामिल हैं। इनमें करीब 88 लाख प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से लौटे हैं। बिहार से सबसे ज्यादा जिले शामिल करने की वजह वहां इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव हैं। यहां जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार है। योजना के तहत गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत साल में 125 दिनों तक रोजगार मुहैया कराने की योजना है।
मोदी ने कहा कि योजना के लिए 50 हजार करोड़ रुपए बजट रखा गया है। कामगारों को योग्यता के हिसाब से 25 तरह के काम दिए जाएंगे। इनमें सड़क, ग्रामीण आवास, बागवानी, पौधारोपण, जल संरक्षण और सिंचाई, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन और जल जीवन मिशन जैसे काम शामिल हैं। जिन 6 राज्यों में योजना लागू हो रही है, वहां 6 में से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में भाजपा, बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन की सरकार है। राजस्थान में कांग्रेस, ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) और झारखंड में  जेएमएम, कांग्रेस और राजद की सरकार है।

किस राज्य में कितने प्रवासी मजदूर लौटे  
उत्तर प्रदेश         : 35 लाख से ज्यादा
मध्यप्रदेश           : 25 लाख से ज्यादा  
बिहार                 : 15 लाख से ज्यादा  
झारखंड               :  2 लाख से ज्यादा
राजस्थान            : 10 लाख से ज्यादा
ओडिशा               : एक लाख से ज्यादा 

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