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मॉक संसद में अनीता जायसवाल का सवाल: वोटर लिस्ट से नाम किसने हटाया?

नई दिल्ली: विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित मॉक संसद में शनिवार को दिल्ली की अनीता जायसवाल का सवाल चर्चा का विषय बन गया। अनीता ने आरोप लगाया कि वह वर्ष 2012 से लगातार हर चुनाव में मतदान करती आई हैं, इसके बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि उनका नाम हटाने का अधिकार आखिर किसने दिया।

मॉक संसद में क्या बोलीं अनीता जायसवाल

अनीता जायसवाल ने खुद को दिहाड़ी मजदूर और अकेले बच्चों की परवरिश करने वाली मां बताया। उनका कहना था कि अगर उन पर किसी तरह का संदेह है तो यह साबित किया जाए कि वह किस देश की नागरिक हैं। उनकी बात के दौरान मौजूद विपक्षी नेताओं ने इसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी शिकायतों का उदाहरण बताया।

अनीता के आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

खरगे के आवास पर हुआ ‘जन महाभियोग’

यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नई दिल्ली स्थित आवास पर हुआ। विपक्ष ने इसे ‘जन महाभियोग’ नाम दिया और संसद की तर्ज पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक कार्यवाही चलाई। कार्यक्रम में गठबंधन के कई सांसद और नेता शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी दिखाई दिए।

विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसी आधार पर गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग कर रहा है।

भाजपा और चुनाव आयोग का पक्ष

भाजपा ने विपक्ष के इन कार्यक्रमों पर लगातार निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 1 नवंबर की रैली की तारीख को लेकर कांग्रेस की आलोचना की, जबकि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने रैली को दिल्ली को ‘बंधक बनाने’ की कोशिश बताया। मॉक संसद में लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

रामलीला मैदान की रैली तक पहुंचा मुद्दा

मॉक संसद के अगले दिन, 1 नवंबर को INDIA गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘दिल्ली चलो’ रैली की। इसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने ‘वोट चोरी’ के आरोप दोहराए। दिल्ली पुलिस ने भीड़ करीब 50 हजार होने का अनुमान लगाया, जबकि भाजपा ने रैली को फ्लॉप बताया।

जिन मतदाताओं को अपना नाम सूची से गायब मिलता है, वे निर्धारित फॉर्म भरकर दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाने की तैयारी में है, जबकि चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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