Friday , August 14 2026
Breaking News
Home / चर्चा में / सेना की 25 साल पहले की सभी गाथायें होंगी सार्वजनिक!

सेना की 25 साल पहले की सभी गाथायें होंगी सार्वजनिक!

मोदी सरकार का फैसला

  • युद्ध और अभियानों का इतिहास रखने से जुड़ी नई नीति को मंजूरी
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी हरी झंडी, मंत्रालय लिखेगा इतिहास
  • राष्‍ट्रीय म्‍यूजियम में जाएंगे 25 साल से ज्‍यादा पुराने रिकॉर्ड
  • इतिहास विभाग जारी करेगा इन रिकॉर्ड्स से जुड़ा इतिहास

नई दिल्‍ली। भारतीय सेना ने अब तक कई युद्ध लड़े हैं और सैकड़ों मिशन पूरे किए हैं। जिनके बारे में जनता को ज्‍यादा जानकारी नहीं मिल पाई। अब मोदी सरकार ने इस बारे में पहल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युद्ध और अभियानों से जुड़े इतिहास को आर्काइव करने, उन्हें गोपनीयता सूची से हटाने और उनके संग्रह से जुड़ी नीति को आज शनिवार को मंजूरी दे दी।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘युद्ध इतिहास के समय पर प्रकाशन से लोगों को घटना का सही विवरण उपलब्ध होगा। शैक्षिक अनुसंधान के लिए प्रमाणिक सामग्री उपलब्ध होगी और इससे अनावश्यक अफवाहों को दूर करने में मदद मिलेगी।’ इस नीति के तहत, रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सभी प्रतिष्ठान मसलन सेना की तीनों शाखाएं (थल-जल-वायु), इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, असम राइफल्स और भारतीय तटरक्षक आएंगे।
वार डायरीज (युद्ध के दौरान घटित घटनाओं का विस्तृत ब्योरा), लेटर्स ऑफ प्रोसिडिंग्स (विभिन्न प्रतिष्ठानों के बीच अभियान/युद्ध संबंधी आपसी संवाद) और ऑपरेशनल रिकॉर्ड बुक (अभियान की पूरी जानकारी) सहित सभी सूचनाएं रक्षा मंत्रालय के इतिहास विभाग को मुहैया कराई जाएंगी। रक्षा मंत्रालय इन्हें सुरक्षित रखेगा, उनका संग्रह करेगा और इतिहास लिखेगा।
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट 1993 और पब्लिक रिकॉर्ड रूल्स 1997 के अनुसार रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी संबंधित प्रतिष्ठान की है।’ नीति के अनुसार, सामान्य तौर पर रिकॉर्ड को 25 साल के बाद सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बयान के अनुसार, ‘युद्ध/अभियान इतिहास के संग्रह के बाद 25 साल या उससे पुराने रिकॉर्ड की संग्रह विशेषज्ञों द्वारा जांच कराए जाने के बाद उसे राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंप दिया जाना चाहिए।’
बयान में कहा गया है कि युद्ध और अभियान के इतिहास के प्रकाशन के लिए विभिन्न विभागों से उसके संग्रह और मंजूरी के लिए इतिहास विभाग जिम्मेदार होगा। नीति रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में समिति के गठन की बात करता है जिसमें थलसेना-नौसेना-वायु सेना के प्रतिनिधियों, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अन्य प्रतिष्ठानों और प्रतिष्ठित इतिहासकारों को समिति में शामिल करने की बात करता है। समिति युद्ध और अभियान इतिहास का संग्रह करेगी।

About team HNI

Check Also

CM धामी ने समस्त जिलाधिकारियों के साथ की वर्चुअल बैठक

सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान में तेजी लाने के निर्देश भू कानून का …

Leave a Reply