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अमेरिका मध्यावधि चुनाव: डेमोक्रेट्स ने छीनी सीनेट, हाउस में भी बहुमत का अनुमान

वॉशिंगटन: अमेरिका मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार डेमोक्रेट्स ने सीनेट पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है, जबकि एबीसी न्यूज के अनुमान के मुताबिक प्रतिनिधि सभा (हाउस) में भी पार्टी बहुमत के लिए जरूरी सीटें जीतने जा रही है।

अमेरिका मध्यावधि चुनाव में किन सीटों ने पलटी बाजी

चुनाव से पहले 100 सदस्यीय सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53 सीटें थीं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक डेमोक्रेट्स ने आयोवा, कंसास, टेक्सस, साउथ कैरोलाइना, ओहायो और नॉर्थ कैरोलाइना जैसे राज्यों में जीत दर्ज की। टेक्सस में जेम्स टैलारिको ने केन पैक्सटन को हराया, जबकि ओहायो में शेरोड ब्राउन ने सीनेटर जॉन हस्टेड को मात दी। जॉर्जिया में जॉन ऑसॉफ ने अपनी सीट बरकरार रखी।

रिपब्लिकन पार्टी फ्लोरिडा और वायोमिंग जैसी सीटें बचाने में कामयाब रही। फ्लोरिडा के विशेष चुनाव में ऐशले मूडी विजयी रहीं।

हाउस में भी डेमोक्रेट्स आगे

435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में चुनाव से पहले रिपब्लिकन के पास 218 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें थीं। एबीसी न्यूज ने अनुमान जताया है कि डेमोक्रेट्स इतनी सीटें जीत लेंगे कि सदन का नियंत्रण उनके हाथ में आ जाए। कई सीटों पर गिनती अभी जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़े आने बाकी हैं।

ट्रंप के एजेंडे पर असर

विश्लेषकों के मुताबिक कांग्रेस के दोनों सदनों में विपक्ष का बहुमत ट्रंप के कार्यकाल के बाकी दो वर्षों की दिशा बदल सकता है। कानून पास कराने से लेकर अहम नियुक्तियों की मंजूरी तक, अब व्हाइट हाउस को डेमोक्रेट्स से तालमेल बिठाना होगा। एपी के अनुसार ट्रंप पहले कह चुके हैं कि वह डेमोक्रेट्स के एजेंडे को रोकने के लिए वीटो का इस्तेमाल करेंगे।

रिपोर्टों के मुताबिक महंगाई, ईरान युद्ध और सरकारी भ्रष्टाचार को लेकर चिंताएं इस चुनाव में मतदाताओं के बड़े मुद्दे रहे। चुनाव से पहले ही 5.7 करोड़ से ज्यादा अमेरिकियों ने अर्ली वोटिंग के जरिए मतदान कर दिया था।

भारत के लिए क्यों अहम

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। व्यापार, टैरिफ, वीजा और रक्षा सहयोग से जुड़े कई फैसलों में अमेरिकी कांग्रेस की अहम भूमिका होती है। ऐसे में सत्ता संतुलन बदलने का असर इन नीतियों पर भी पड़ सकता है, जिस पर नई दिल्ली की नजर रहेगी।

सभी सीटों के अंतिम नतीजे आने के बाद नई कांग्रेस जनवरी में कामकाज संभालेगी।

फोटो: Noclip / Wikimedia Commons, Public domain

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