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यमुनोत्री धाम में बाउंसर तैनात, छिड़ी बहस; सुरक्षा पर सवाल

बड़कोट। उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम की यात्रा इस बार एक अलग ही वजह से चर्चा में है। करीब 5 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर इस बार श्रद्धालुओं के साथ-साथ चार बाउंसर भी तैनात नजर आ रहे हैं। इन बाउंसरों की नियुक्ति का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बिना टोकन के चलने वाले डंडी-कंडी और घोड़ा-खच्चर संचालकों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। वहीं, इससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बाउंसरों की आवश्यकता क्यों पड़ी?

स्थानीय लोगों और मजदूरों का कहना है कि धाम क्षेत्र में पहले से पुलिस बल और आईटीबीपी के जवान तैनात हैं, ऐसे में बाउंसरों की आवश्यकता क्यों पड़ी। कुछ लोगों ने इसे यात्रा व्यवस्था बनाए रखने और अव्यवस्था रोकने के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कई लोगों का मानना है कि इससे पहाड़ की शांत फिजाओं में भय और असहजता का माहौल बन सकता है।

जिला पंचायत कुली एजेंसी इंचार्ज शत्रुघन सिंह राणा ने बताया कि यात्रा सीजन में कई बार कुछ मजदूर रोटेशन व्यवस्था तोड़कर यात्रियों को ले जाने का प्रयास करते हैं, जिससे विवाद और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि एजेंसी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और अनुशासन कायम रखने के उद्देश्य से बाउंसरों की तैनाती की गई है।

वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता संदीप राणा ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक और शांत वातावरण वाले यमुनोत्री धाम में पहले से पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद हैं। ऐसे में बाउंसरों की तैनाती से स्थानीय लोगों, मजदूरों और यात्रियों के बीच अनावश्यक भय का माहौल बन सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

धाम क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि बाउंसरों की यह तैनाती केवल अस्थायी व्यवस्था है या भविष्य में भी इसे जारी रखा जाएगा।

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