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त्रिवेंद्र के प्रयास ला रहे रंग : देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी!

खाते में जुड़ी एक और उपलब्धि

  • जनवरी 2019 में एनएचएआई ने तो दी थी मंजूरी, पर भारतीय वन्यजीव बोर्ड में अटका था मामला 
  • करीब 180 किमी बनना है यह एक्सप्रेसवे और मात्र ढाई घंटे में दून से पहुंच सकेंगे दिल्ली
  • दून में डाटकाली मंदिर से सहारनपुर, शामली, बागपत होते हुए दिल्ली से जुड़ेगा एक्सप्रेसवे  

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के प्रयासों से देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे बनने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने भी इस परियोजना को हरी झंडी दे दी है। 180 किलोमीटर के इस एक्सप्रेस के बनने से देहरादून से दिल्ली मात्र ढाई घंटे में ही पहुंचा जा सकेगा। यह एक्सप्रेसवे दून से सहारनपुर, शामली, बागपत होते हुए दिल्ली से जुड़ेगा। 
गौरतलब है कि देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के लिए पिछले साल जनवरी में मंजूरी दी गई थी। उस समय एनएचएआई के चेयरमैन एसएस संधू ने कहा था कि यह एलिवेटिड रोड होगा। इसमें कुछ हिस्सा राजाजी पार्क और कुछ हिस्सा उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्र का है। इसी को देखते हुए एनएचएआई ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भारतीय वन्यजीव बोर्ड से सहमति के लिए कोशिश का आग्रह किया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने निजी तौर पर इसके लिये प्रयास किये। 
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री की पहल पर भारतीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के तहत देहरादून के निकट डाटकाली मंदिर के पास राज्य की सीमा पर सुरंग का निर्माण भी किया जाना है।
हालांकि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में उत्तर प्रदेश के गणेशपुर से लेकर देहरादून के बीच करीब 20 किमी के हिस्से में वन्यजीव बोर्ड की सहमति की जरूरत थी। यह हिस्सा राजाजी टाईगर रिजर्व पार्क और शिवालिक एलिफेंट रिजर्व पार्क का है। इसमें साल का जंगल भी है और साल के करीब 2.5 हजार पेड़ों के कटने का अनुमान भी लगाया जा रहा है। शिवालिक क्षेत्र में साल के पेड़ों के कटने को लेकर ही पर्यावरणविद चिंता भी जाहिर कर रहे हैं। इनका कहना है कि साल का पेड़ बढ़ने में लंबा समय लेता है। वन विभाग के मुताबिक भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने न्यूनतम नुकसान के आधार पर यह मंजूरी दी है। एक्सप्रेसवे को दिल्ली और देहरादून की कनेक्टिविटी के लिहाज से प्रदेश सरकार महत्वपूर्ण मान रही है। इस बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने से त्रिवेंद्र सिंह रावत के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है।

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