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24 घंटे में चीन का दूसरा बयान, कहा- गालवन वैली हमेशा से हमारी!

भारत-चीन सीमा विवाद

  • झड़प के करीब 36 घंटे बाद पहली बार भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, गालवन में सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया
  • राहुल ने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री कहां हैं? वे छिपे हुए क्यों हैं? अब बहुत हुआ। हम जानना चाहते हैं कि आखिर क्या हुआ’
  • दिग्विजय का ट्वीट, ‘मोदी की विदेश यात्राएं कितनी सफल रहीं, इसका प्रमाण दें। जुमलेबाजी छोड़कर हर क्षेत्र में असफल रहे’
  • भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार 15 से 20 सैनिक लापता, इनमें से कुछ चीन के कब्जे में, चीन रुक-रुककर जवानों के शव
  • सूत्रों के मुताबिक 20 में से 3 सैनिक गोलियां लगने से शहीद हुए, 45 जवानों को बंधक बनाया गया और इनमें से 25 को छोड़ा
  • ब्रिटेन ने कहा- हमारी हालात पर नजर, भारत और चीन बातचीत के जरिए विवाद सुलझाएं, हिंसा से किसी को नहीं होगा फायदा

लद्दाख। भारत और चीन के सैनिकों के बीच गालवन घाटी में हुई झड़प का मामला बढ़ गया है। झड़प के करीब 36 घंटे बाद पहली बार भारत की तरफ से बयान जारी हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गालवन में सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया। देश उनकी शहादत हमेशा याद रखेगा। तीन घंटे चली यह झड़प दुनिया की दो एटमी ताकतों के बीच लद्दाख में 14 हजार फीट ऊंची गालवन वैली में हुई। यह हमला पत्थरों, लाठियों और धारदार चीजों से किया गया।
न्यूज एजेंसी ने आज बुधवार को सूत्रों के हवाले से कहा कि चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं, जिनमें यूनिट का कमांडिंग अफसर भी शामिल है। यह अफसर उसी चीनी यूनिट का था, जिसने भारतीय जवानों के साथ हिंसक झड़प की। भारत के 4 जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। 15-16 जून की दरमियानी रात को गलवान घाटी में हुई झड़प में भारत के कमांडिंग अफसर समेत 20 जवान शहीद हो गए थे, 135 जख्मी हैं।
उधर भारत ने चीन की तरफ हुई बातचीत इंटरसेप्ट की थी। इसके मुताबिक, चीन के 43 सैनिक हताहत होने की खबर है, लेकिन चीन ने यह कबूला नहीं है।चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियन ने कहा कि गालवन घाटी की संप्रभुता हमेशा से चीन का हिस्सा ही रही है। भारतीय सेना ने बॉर्डर प्रोटोकॉल तोड़ा। उन्होंने न केवल सीमा का उल्लंघन किया, बल्कि कमांडर लेवल की बातचीत का भी ध्यान नहीं रखा। हम भारत से कहना चाहते हैं कि वे अपनी अग्रिम टुकड़ियों को अनुशासन में रहने को कहें। उकसाने वाली गतिविधियां न करें और हमारे साथ मिलकर काम करें, ताकि विवादों को बातचीत के जरिए हल करने की सही दिशा में बढ़ा जा सके। हम और झड़प नहीं चाहते।
चीन से जारी तनाव के बीच हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। इन जिलों की सीमाएं चीन से लगती हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस कवायद का मकसद स्थानीय लोगों को खतरे से बचाना और खुफिया जानकारी जुटाना है। पुलिस ने कहा कि लोगों की हिफाजत के लिए तमाम जरूरी कदम उठाए गए हैं। राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से चर्चा की। आज बुधवार को सेना बयान जारी कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच सीमा पर जो बातचीत चल रही थी, वह बेनतीजा रही। हिंसक झड़प में चीनी सैनिकों को भी काफी नुकसान हुआ। यह बात इसलिए सामने आई, क्योंकि झड़प के बाद घटनास्थल पर कई चीनी एम्बुलेंस आईं। साथ ही चीनी हेलिकॉप्टर की मूवमेंट भी बढ़ी। भारतीय सूत्रों ने यह भी कहा कि चीन की तरफ के कितने सैनिक मारे गए, इस बारे में स्पष्ट तौर से बता पाना तो मुश्किल है, लेकिन यह संख्या 40 या इससे ज्यादा हो सकती है।
अमेरिकन इंटेलिजेंस के मुताबिक- झड़प में एक चीनी अफसर समेत 35 सैनिक मारे गए। यह तब हुआ, जब दोनों पक्षों के बीच सीमा पर शांति को लेकर बातचीत चल रही थी। भारत में ब्रिटिश हाईकमीशन के प्रवक्ता ने कहा कि हम हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हम यही चाहेंगे कि भारत और चीन बातचीत के जरिए विवाद सुलझाएं। हिंसा से किसी को फायदा नहीं होगा।
सीमा पर तनाव, राजनीति भी शुरू : राहुल ने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री कहां हैं? वे छिपे हुए क्यों हैं? अब बहुत हुआ। हम जानना चाहते हैं कि आखिर क्या हुआ। हमारे सैनिकों को मारने की चीन की हिम्मत कैसे हुई। वह हमारी जमीन पर कब्जा करने की हिम्मत कैसे कर सकता है?’’ वहीं दिग्विजय ने ट्वीट किया कि मोदी की विदेश यात्राएं कितनी सफल रहीं, इसका प्रमाण दें। प्रधानमंत्री जुमलेबाजी छोड़कर हर क्षेत्र में असफल रहे।
चीन रुक-रुककर भेज रहा भारतीय सैनिकों के शव : सेना के सूत्रों ने बताया कि 15 से 20 सैनिक लापता हैं। इनमें से कुछ चीन के कब्जे में हैं। चीन रुक-रुककर भारतीय सैनिकों के शव भेज रहा था। कुछ सैनिक नदी में गिर गए हैं, जिनके शव मिल रहे हैं। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के हेलिकॉप्टरों का मूवमेंट बढ़ गया है। वह अपनी सेना के हताहतों को एयरलिफ्ट कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, 20 में से 3 सैनिक गोलियां लगने से शहीद हुए। 45 जवानों को बंधक बनाया गया और इनमें से 25 को छोड़ दिया गया। इससे पहले सेना ने आधिकारिक बयान में कहा था कि दोनों सेनाएं अब पीछे हो चुकी हैं। लाइन ऑफ ड्यूटी के दौरान भारत के 17 सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। वे शून्य से भी कम तापमान में ऊंचाई वाले इलाकों में थे। इस वजह से उनकी जान चली गई। हमारे जो जवान शहीद हुए हैं, उनमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का नाम भी शामिल हैं। दो अन्य नामों की पुष्टि हुई है। ये हैं- हवलदार पालानी और सिपाही कुंदन झा। बाकी नाम अभी सामने नहीं आए हैं।  
इस समय पूरे देश में सवाल उठाये जा रहे हैं कि दिल्ली से गालवन महज 1200 किमी दूर है, फिर भी देश की जनता को सच नहीं बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री सहित सभी केंद्रीय नेता मौन साधे बैठे हैं। इस बाबत राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि बहुत हो चुका, अब देश को हकीकत बता देनी चाहिये।

यह है घटनाक्रम और मोदी सरकार का रवैया

सोमवार रात 12 से 2 बजे के बीच: लद्दाख के गालवन में बड़ी घटना होती है। पर इसकी सूचना किसी को नहीं मिलती। दिल्ली के रास्ते देश को भी नहीं।
मंगलवार दोपहर करीब 12.45 बजे: खबर आती है कि सीओ, यानी कमांडिंग ऑफिसर समेत तीन सैनिक शहीद हो गए हैं।
दोपहर 1 बजे: घटना के करीब 11 घंटे बाद सेना बयान जारी कर कहती है कि हां, कर्नल समेत हमारे तीन जवान शहीद हुए हैं।
दोपहर 3 बजे: प्रधानमंत्री दिल्ली में बैठकर 20 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करते हैं। विषय होता है कोरोना। जिसमें मोदी देश को बता रहे हैं कि मास्क पहनकर निकलिये।
रात 8 बजे: मुख्यमंत्रियों से बैठक के बाद रात 9 बजे के करीब प्रधानमंत्री के घर पर रक्षामंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की बैठक होती है।
रात 10 बजे: इसी दौरान खबर आती है कि चीन की बॉर्डर पर 20 जवान शहीद हुए हैं, संख्या बढ़ सकती है। फिर खबर आती है कि चीन के भी 43 जवान या तो मारे गए हैं, या घायल हुए हैं।
मंगलवार रात 10.30 बजे: प्रधानमंत्री के घर पर जारी बैठक खत्म, लेकिन आज बुधवार दोपहर तक किसी का कोई बयान नहीं आया।
झड़प के बाद चीन की बातचीत की पहल : सोमवार रात की घटना के बाद चीन डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुट गया। मंगलवार सुबह 7:30 बजे चीन की पहल पर ही गालवन वैली में मीटिंग बुलाई गई। इसमें दोनों देशों के बीच मेजर जनरल लेवल की बातचीत हुई।
भारत का चीन का जवाब- आपसी रजामंदी का ध्यान रखा होता तो ऐसा न होता : झड़प की बात सामने आने के करीब 8 घंटे बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों तरफ नुकसान हुआ है। अगर चीन की तरफ से हाई लेवल पर बनी आपसी सहमति का ध्यान रखा जाता तो दोनों तरफ हुए नुकसान को टाला जा सकता था। भारत ने हमेशा अपनी सीमा में रहकर ही मूवमेंट किया है। हम उम्मीद करते हैं कि चीन भी ऐसा ही करे।

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