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पहाड़ों में प्रसूताओं के जीवन की डोर भगवान भरोसे

  • टाॅर्च की रोशनी में बढ़ियारगढ़ की महिला ने एंबुलैंस में तीन बच्चों को दिया जन्म
  • आधा किलोमीटर चारपाई में लेटाकर लाए महिला को
  • बेस अस्पताल में किया भर्ती, जच्चा-बच्चा चारों स्वस्थ

टिहरी। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसूताओं के जीवन की डोर भगवान भरोसे हैं। बीते जमाने की तरह यहां आज भी टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराया जाता है। ऐसे ही चैरिखाल की एक महिला ने तीन बच्चों को टाॅर्च की रोशनी में जन्म दिया। जच्चा-बच्चा चारों स्वस्थ हैं। जानकारी के अनुसार बढ़ियारगढ़ क्षेत्र के चैरिखाल गांव में देर रात एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने लगी। परिजनों ने तुरंत 108 सेवा को फोन किया। देर रात करीब 11 बजे जब तक 108 एंबुलेंस गांव पहुंची, तब तक टाॅच की रोशनी में एक बच्चे का जन्म हो गया था। क्यों इन दिनों लाइट नहीं होने से पहाड़ी क्षेत्रों मंे बुरा हाल है। कुछ देर बाद फार्मासिस्ट हिमांशु और एंबुलेंस चालक महेंद्र गांव में पहुंचे और प्रसूता को जरूरी दवाइयां दीं। ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर परिजन महिला को चारपाई में लेटाकर आधा किलोमीटर पैदल मुख्य मार्ग तक लाए। उसके बाद एंबुलेंस से श्रीनगर के बेस हॉस्पिटल ले जा रहे थे कि महिला ने रास्ते में भी दो और बच्चों को जन्म दे दिया। महिला और तीनों बच्चे स्वस्थ हैं, उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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