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सीएम धामी ने किया ‘भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस’ पर अमर शहीदों को याद, जानें क्यों मनाया जाता है यह खास दिन?

देहरादून। किसी भी देश के लिए उसकी सबसे बड़ी संपत्ति में से एक उसके सैनिक होते हैं। देश को सुरक्षित और अखंड बनाए रखने में सैनिक अहम भूमिका निभाते हैं। भारत के लिए अपना सवोच्छ बलिदान देने वाले इन सैनिकों के सम्मान में सालों से ‘भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस’ मनाने की परंपरा चली आ रही है। आज यानी 7 दिसंबर को भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन हमारे देश के सभी सैनिकों के लिए है। देशवासी आज के दिन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं। इस दिन को मनाने के लिए, भारतीय सशस्त्र बलों की सभी तीन शाखाएं – भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना आम जनता को दिखाने के लिए विभिन्न प्रकार के शो, कार्निवल, नाटक और अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं।

‘भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस’ के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले अपने वीर सैनिकों पर हमें गर्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सशस्त्र सेना झंडा दिवस‘ का यह अवसर राष्ट्र के सजग प्रहरियों के अविस्मरणीय बलिदानों और सेवाओं को स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी दिन है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के नागरिकों से ‘सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष’ में सैनिक परिवारों के कल्याण के लिए अपना योगदान देने की भी अपील की है
क्यों मनाया जाता है सशस्त्र सेना झंडा दिवस?
आजादी के बाद सरकार को शहीद सैनिकों के परिवारों की भी जरूरतों का ख्याल रखने की आवश्यकता महसूस हुई। जिसके लिए एक दिन जनता में छोटे-छोटे झंडे बांट कर दान धन अर्जित कर उसका फायदा शहीद सैनिकों के आश्रितों को दिए जाने का फैसला लिया गया। भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में 28 अगस्त 1949 को एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने हर साल 7 दिसंबर को झंडा दिवस मनाने का फैसला किया। यह दिन मुख्य रूप से लोगों को झंडे बांटने और उनसे धन इकट्ठा करने के लिए मनाया जाता है। देश भर में लोग धन के बदले में तीन सेवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लाल, गहरे नीले और हल्के नीले रंग में छोटे झंडे और कार के झंडे वितरित करते हैं। 7 दिसंबर, 1949 से शुरू हुआ यह सफर आज तक जारी है। शुरूआत में इसे झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता था लेकिन 1993 से इसे सशस्त्र सेना झंडा दिवस का रूप दे दिया गया। हमारी भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही हमें कभी उन सैनिकों को याद करने का मौका मिलता होगा जो हमारी सुरक्षा के लिए शहीद हो गए हैं। लेकिन आज के दिन अगर मौका मिले तो हमें उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। इसलिए रेलवे स्टेशनों पर, स्कूलों में या अन्य स्थलों पर अगर आज लोग आपको झंडे लिए मिलें तो आप झंडा खरीद कर इस नेक काम में अपना योगदान जरूर दें। 

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